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दुनिया

मेडिकल छात्र से जमात के ‘अमीर’ तक का सफर… कौन हैं शफीकुर रहमान जिन्हें पछाड़कर तारिक बने बांग्लादेश के ‘कैप्टन’

बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी की शानदार वापसी के बाद डॉ. शफीकुर रहमान अचानक सुर्खियों में आ गए हैं. आखिर कौन हैं रहमान और उन्होंने कैसे इस विवादित पार्टी का चेहरा बदल दिया?

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Written By: Raja Alam Updated: Feb 13, 2026 19:08

बांग्लादेश संसदीय चुनावों में बीएनपी की आंधी के बीच जमात-ए-इस्लामी के प्रदर्शन ने सबको चौंका दिया है. करीब एक दशक से अधिक समय तक चुनाव लड़ने से रोकी गई इस पार्टी ने 68 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत वापसी का संकेत दिया है. इस सफलता के पीछे पार्टी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान की रणनीति को बड़ा कारण माना जा रहा है. रहमान ने जमात को उसके पुराने और कट्टर सांगठनिक ढांचे से बाहर निकालकर आम लोगों, पेशेवरों और यहां तक कि अल्पसंख्यकों तक पहुंचाया है. उनकी इस कोशिश ने जमात को बांग्लादेश की राजनीति में फिर से एक अनिवार्य ताकत बना दिया है.

छात्र राजनीति से अमीर बनने तक का सफर

शफीकुर रहमान का जन्म 31 अक्टूबर 1958 को हुआ था और उनकी राजनीतिक यात्रा 1973 में छात्र राजनीति से शुरू हुई थी. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में वे वामपंथी झुकाव वाली जासद छात्र लीग में शामिल हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को समेट लिया और इस्लामी छात्र संगठन की ओर मुड़ गए. साल 1984 में वे औपचारिक रूप से जमात-ए-इस्लामी में शामिल हुए. अपनी सांगठनिक क्षमता के दम पर वे पार्टी में लगातार ऊपर बढ़ते गए और साल 2019 में पहली बार पार्टी के अमीर चुने गए. तब से वे लगातार तीसरी बार इस पद पर बने हुए हैं.

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यह भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव: तारिक रहमान कल ले सकते हैं PM पद की शपथ, 10 प्वाइंट्स में जानिए कैसे BNP की आंधी में उड़ी ‘जमात’

मुश्किल दौर में संभाली पार्टी की कमान

एक समय ऐसा था जब जमात-ए-इस्लामी नेतृत्वहीनता के संकट से जूझ रही थी क्योंकि अवामी लीग सरकार के दौरान युद्ध अपराधों के आरोप में पार्टी के कई दिग्गज नेताओं को फांसी की सजा हो गई थी. ऐसे कठिन समय में शफीकुर रहमान ने बागडोर संभाली और पार्टी को बिखरने से बचाया. उन्होंने उन नेताओं की जगह नए और स्वीकार्य चेहरों को आगे बढ़ाने की मांग का समर्थन किया, जो बांग्लादेश की आधुनिक जमीनी हकीकत को समझते थे. उनके नेतृत्व में ही जमात ने मुक्ति योद्धाओं और अल्पसंख्यकों को भी अपने साथ जोड़कर चुनावी मैदान में उतारा.

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पड़ोसी देशों की नजर और भविष्य की चुनौतियां

जमात के इस उभार और शफीकुर रहमान के बढ़ते कद पर न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि भारत के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में भी गहरी नजर रखी जा रही है. जमात के विचार खासकर महिलाओं, अल्पसंख्यकों और देश के चरित्र को लेकर हमेशा चर्चा और विवादों में रहे हैं. रहमान का दावा है कि उन्होंने पार्टी को एक खास दायरे से निकालकर लोकतांत्रिक मुख्यधारा का हिस्सा बनाया है. अब देखना यह होगा कि बीएनपी के साथ मिलकर या विपक्ष में रहकर जमात आने वाले समय में बांग्लादेश की स्थिरता और विकास में क्या भूमिका निभाती है.

First published on: Feb 13, 2026 07:08 PM

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