क्या पाकिस्तान के Gen Z आलसी हैं? भारत-नेपाल की तरह वहां क्यों नहीं होता आंदोलन, वजह जान चौंक जाएंगे आप

Gen Z Protests: बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और संसाधनों में हिस्सेदारी को लेकर आंदोलन लगातार चलते रहे हैं, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बिजली दरों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन हुए हैं.

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भारत में दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा, साथ ही सरकार को भी Gen Z की ताकत का एहसास हुआ. सोशल मीडिया पर छात्र आंदोलन के कई वीडियो दुनियाभर में वायरल हुए. भारत से पहले नेपाल में राष्ट्रीय स्तर पर Gen Z आंदोलन हुआ था, जिसने वहां की केपी ओली सरकार को ही उखाड़ फेंका. भारत और बांग्लादेश में जहां ‘जेन जी’ युवाओं ने सरकार की नाक में दम कर दिया, वहीं पाकिस्तान के युवा घरों में बैठे हैं. वहां ऐसा कोई भी बड़ा आंदोलन देखने को नहीं मिला है.

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भारत-नेपाल के Gen Z आंदोलन


पाकिस्तान में आर्थिक संकट, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई समस्याएं हैं, लेकिन किसी भी मुद्दें के खिलाफ युवा आंदोलन क्यों नहीं देखने को मिलता? सवाल उठता है कि क्या सच में पाकिस्तान के ‘जेन जी’ युवा आलसी हैं, या कोई और वजह है? हालांकि कई जानकारों का ऐसा मानना नहीं है. सिर्फ भारत-नेपाल ही नहीं, बल्कि श्रीलंका में भी युवाओं ने अपनी सरकारों पर दबाव बनवाकर मांगें पूरी करवाई हैं. वहीं, जब बात पाकिस्तान की आती है तो जनता कई मुद्दों से परेशान है, लेकिन कोई भी जेन जी युवा आंदोलन वहां देखने को नहीं मिला.

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क्या आलसी हैं पाकिस्तान के Gen Z?


इस पर विदेश नीति विश्लेषक माइकल कुगेलमैन का कहना है कि जिन वजहों से दूसरे देशों में युवा सड़कों पर उतरे, वही परिस्थितियां पाकिस्तान में भी मौजूद हैं, लेकिन वहां आंदोलन का स्वरूप अलग है. इसकी सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान में छात्र राजनीति का कमजोर होना है. 1980 के दशक में जनरल जिया-उल-हक की सैन्य सरकार ने छात्र संघों पर प्रतिबंध लगा दिया था. यही प्रतिबंध आज भी पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों में संगठित छात्र नेतृत्व के विकास में बड़ी बाधा माना जाता है.

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पाकिस्तानी युवाओं की सबसे बड़ी कमजोरी


इससे पहले 1968-69 के जनआंदोलन में छात्रों ने तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के खिलाफ अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन छात्र संघों पर रोक के बाद कैंपस आधारित राजनीतिक संगठन लगभग खत्म हो गए. 2018 से 2022 के बीच ‘स्टूडेंट्स सॉलिडैरिटी मार्च’ जैसे प्रयास जरूर हुए, लेकिन वे व्यापक जनसमर्थन हासिल नहीं कर सके. हालांकि पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन पूरी तरह गायब भी नहीं हैं. बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और संसाधनों में हिस्सेदारी को लेकर आंदोलन लगातार चलते रहे हैं, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बिजली दरों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन हुए हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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