यात्री ने बताई आपबीती
ये साफ नहीं है कि एयरलाइन ने इसके बारे में कोई जानकारी क्यों नहीं दी है. हालांकि, प्लेन में मौजूद एक यात्री ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में उन गुमानाम नायकों की जांबाजी के बारे में पूरा ब्योरा दिया. डैनियल श्लिच्टर
ने कहा, ”ये एक चमत्कार है. हर फ्लाइट में दो एक्सट्रा पायलट नहीं लाए जाते. इस केस में उन्हें इसलिए लाया गया था क्योंकि उन्हें प्लेन को तेल अवीव से दुबई वापस लाना था और यही एकमात्र वजह थी कि वो वहां मौजूद थे.” इस प्रक्रिया को ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है.
रहस्यमयी फरिश्तों ने कैसे बचाई जान?
श्लिच्सटर ने बताया कि जब चीखते-चिल्लाते यात्रियों को पता चला कि कॉकपिट में क्या हो रहा है, तो वो दो लोग हरकत में आए. उन्होंने कहा, ”को-पायलट बार-बार कैप्टन पर हमला कर रहा था और हर तरफ खून फैला हुआ था. बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे.” श्लिच्टर ने बताया कि जब एक यात्री ने को-पायलट को पकड़कर बाहर खींचा और दूसरे लोगों ने उस आदमी को काबू करने के लिए उससे हाथापाई की, तो यात्रा कर रहे पायलटों में से एक ने भीड़ के ऊपर से कूदकर कॉकपिट में प्रवेश किया और कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया.
‘उन्होंने हीरो की तरह काम किया’
श्लिच्टर ने कहा ”वो असल में उन लोगों के ऊपर से कूद रहा था जो उस आतंकवादी को संभाल रहे थे और वो पायलट एरिया तक पहुंचा और कंट्रोल संभालने लगा. फिर दूसरा व्यक्ति भी शामिल हो गया और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि कोई और वहां मौजूद रहे.’ श्लिच्टर और अन्य लोगों को यह नहीं पता था कि वे दो लोग कहां से आए थे. लेकिन पहला व्यक्ति जो भी था, वह बहुत तेज़ी से आगे बढ़ा. श्लिचर ने कहा, “उन्होंने सच में एक हीरो की तरह काम किया, प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में लिया और ऐसे रिएक्ट किया जैसे उन्हें ठीक-ठीक पता हो कि क्या हो रहा है.”