मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने युद्धविराम और शांति की दिशा में एक नया दांव चला है. ईरान ने लगभग सात महीने से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने ‘सात दिवसीय’ शांति प्रस्ताव रखा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस योजना की पुष्टि करते हुए बताया कि तेहरान की यह नई पहल अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए पुराने समझौते की शर्तों पर ही आधारित है, जो लागू होने के कुछ समय बाद ही टूट गया था.
एक हफ्ते में खुल सकता है अहम समुद्री रास्ता
ईरानी मध्यस्थों ने यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस तक पहुंचा दिया है. इसके तहत फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता महज एक सप्ताह के भीतर फिर से चालू हो सकता है. बता दें कि आम दिनों में दुनिया की कुल ऊर्जा और तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है.
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में अराघची ने कहा, “हमने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने एक साफ योजना रखी है. यदि तय शर्तें पूरी होती हैं, तो सातवें दिन के अंत तक होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा और दोनों पक्षों के बीच व्यापक बातचीत दोबारा शुरू हो जाएगी.”
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‘हमें कोई जल्दबाजी नहीं, फैसला अमेरिका के हाथ में’
विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट किया कि तेहरान इस समझौते को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले सहमति बन जाती है तो यह बेहतर होगा, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन को ही लेना है. उन्होंने कहा कि ईरान का प्लान पूरी तरह स्पष्ट है-जिस दिन अमेरिका इसे स्वीकार करेगा, उसके अगले दिन से सात दिनों की समय सीमा शुरू हो जाएगी.
परमाणु विवाद पर बना हुआ है सस्पेंस
इस पूरे प्रस्ताव में सबसे बड़ा पेंच परमाणु गतिविधियों को लेकर है. अराघची ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि इस नए सात दिवसीय फॉर्मूले में परमाणु मुद्दे को शामिल किया गया है या नहीं. अमेरिका लगातार यह मांग करता रहा है कि ईरान पर ऐसे कड़े प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय लागू हों जिससे वह कभी परमाणु हथियार न बना सके. वहीं, ईरान का रुख है कि उसे अपने नागरिक उपयोग के लिए शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने की पूरी छूट मिलनी चाहिए. यही विवाद लंबे समय से किसी भी स्थायी शांति समझौते की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है.
ट्रंप प्रशासन बोला- हम समझौते की जल्दबाजी में नहीं
ईरान के शांति प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख भी सामने आ गया है. वार्ता की जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन मध्यस्थों के जरिए सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा कर रहा है, लेकिन अमेरिका किसी समझौते पर पहुंचने की जल्दबाजी में बिल्कुल नहीं है. अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका बहुत मजबूत स्थिति में है. उन्होंने बताया कि कल रात ही जलडमरूमध्य से लगभग 22 मिलियन बैरल तेल निकाला गया है, इसलिए वाशिंगटन पर किसी तरह का दबाव नहीं है.
जून में क्यों टूटा था समझौता?
गौरतलब है कि जून के महीने में हुआ युद्धविराम इसलिए विफल हो गया था क्योंकि तेहरान ने इसे जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण की मान्यता समझ लिया था. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया था. इससे पहले, फरवरी के अंत में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं. साथ ही जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे तेहरान से तालमेल किए बिना यहां से न गुजरें. इस वजह से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी और दुनिया भर में ऊर्जा व कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं.
संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप की चेतावनी, ईरानी राष्ट्रपति का जवाब
यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राजनयिक संपर्क की बात मानी, लेकिन साथ ही ईरान को चेतावनी दी कि वह संघर्ष खत्म करने के लिए समझौता करे या फिर “विनाश” का सामना करने को तैयार रहे. ट्रंप के इस बयान के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल वॉकआउट कर गया.
इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने महासभा में कहा कि ईरान को बाहरी खतरों से बचने के लिए शक्तिशाली होना ही होगा. पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी के दबाव या धमकियों की भाषा को स्वीकार नहीं करेगा, हालांकि वह संवाद और कूटनीति के लिए तैयार है. उन्होंने दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा, लेकिन उसे शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि जो दुनिया केवल युद्ध और धमकियों की भाषा समझती है, वह कभी सुरक्षित नहीं रह सकती.
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