Donald Trump Confirms US Strike on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कंफर्म किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के एक ठिकाने पर सैन्य हमला किया है. उन्होंने इस कार्रवाई को एक ‘सीमित हमला’ बताया है. ये जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है जब रणनीतिक रूप से अहम ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास स्थित केशम आइलैंड पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरें आ रही हैं.
कंस्ट्रक्शन वर्क के बाद हमला
3 नवंबर को फॉक्स न्यूज से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के एक ‘एंटी-एयरक्राफ्ट’ फैसिलिटी को निशाना बनाया. ये हमला तब किया गया, जब उस ठिकाने का कंस्ट्रक्शन वर्क पूरा ही हुआ था. ‘फॉक्स एंड फ्रेंड्स’ प्रोग्राम के दौरान एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘उन्होंने एक एंटी-एयरक्राफ्ट फैसिलिटी को निशाना बनाया था. जैसे ही वो बनकर तैयार हुआ, हमने कल रात उस पर जोरदार हमला कर दिया.’
अमेरिका ने केशम आइलैंड को क्यों निशाना बनाया?
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक ये एक सीमित सैन्य हमला था. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे ‘डिफेंसिव’ कार्रवाई बताया है. इसका मकसद ईरान की उस क्षमता को सीमित करना था, जिससे वो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को खतरा पहुंचा सकता है. फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इस अहम समुद्री मार्ग में भारी बाधाएं आई हैं, जिससे इंटरनेशल ऑयल सप्लाई का एक अहम गलियारा प्रभावित हुआ है. इस बीच ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘IRNA’ ने बताया कि केशम आइलैंड पर लगातार कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं. स्थानीय लोगों ने भी इस इलाके के ऊपर 2 विमान उड़ते देखे जाने की बात कही है.
इजरायल को कब तक मदद देगा अमेरिका
इसी इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इजरायल को अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक सहायता के बारे में भी बात की. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने दिसंबर 2026 तक इजरायल को दी जाने वाली सालाना अमेरिकी मदद को बंद करने पर सहमति जताई है. मौजूदा वक्त में 10 साल का सुरक्षा सहायता समझौता लागू है, जिसके तहत इजरायल को हर साल 3.8 अरब डॉलर मिलते हैं और ये समझौता 2028 तक चलना है. ट्रंप ने कहा कि नियमित आर्थिक मदद बंद होने के बावजूद, अगर इजरायल के सामने सुरक्षा चुनौतियां आती हैं, तो अमेरिका उसे समर्थन देना जारी रख सकता है.
ईरान के साथ फिर बढ़ा तनाव
ये हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब खबरें आ रही हैं कि नेतन्याहू, ट्रंप से अमेरिका के मिड-टर्म इलेक्शन के बाद ईरान के खिलाफ और ज्यादा सैन्य कार्रवाई करने पर विचार करने की गुजारिश कर रहे हैं. हालांकि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ये संकेत दिया है कि वे लंबे सैन्य टकराव के बजाय कूटनीति और किसी संभावित समझौते को प्राथमिकता देते हैं.