बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कमिश्नर अश्विनी भिड़े पर गाज गिरी है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने भिड़े समेत बाकी नगर अधिकारियों की नवंबर महीने की सैलरी पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया. अदालत ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण ना हटाने की वजह से उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी शुरू कर दी है. दरअसल, BMC ने ये अपील की थी कि मुंबई के बोरीवली में ‘बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट’ (BEST) बस स्टेशन के लिए तय जमीन से अतिक्रमण हटाने के पिछले आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन का एक्सट्रा समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने BMC पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया है.
कोर्ट ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए भिड़े को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया. अदालत ने उनसे पूछा कि आखिर आदेशों का पालन ना करने के मामले में उनके खिलाफ अवमाननना की कार्रवाई शुरू ना की जाए. बेंच ने साफ किया कि जब तक कारण बताओ नोटिस पर कोई फैसला नहीं हो जाता और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं कर लिया जाता, तब तक कमिश्नर और बाकी अधिकारियों को उनका वेतन नहीं मिलेगा.
‘मिलीभगत की तो जेल भेज देंगे’
जस्टिस बागची ने कहा, ”1 दिसंबर 2026 तक आपको वेतन नहीं मिलेगा. इसलिए, उससे पहले आदेश का पालन करें. आप यहां आएं, उसके बाद ही आपको वेतन मिल सकेगा.” सुनवाई के दौरान, बेंच ने नगर निगम के अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठाए और कहा कि हो सकता है कि वो अदालत के निर्देशों के पालन में देरी करने के लिए अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत कर रहे हों. CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर वो ऐसा करते हैं को उन्हें जेल भेज दिया जाएगा, तब जाकर उन्हें अदालत के आदेश की अहमियत समझ आएगी.