अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन 2026 हैं और इन चुनाव में न्यूयॉर्क के मेयर इलेक्शन की तरह पॉलिटिकल टर्म समोसा कॉक्स की खूब चर्चा हो रही है. इस टर्म का जिक्र जून 2023 में अमेरिका दौरे के दौरान वहां की संसद में स्पीच देते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं. लेकिन बता दें कि यह टर्म एक ग्रुप का नाम है, जो साल 2018 में अमेरिकी की संसद में भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के नेताओं के ग्रुप को दिया था. यह ग्रुप कोई आधिकारिक या वैधानिक संगठन नहीं है, बल्कि अनौपचारिक समूह है, जो अमेरिका की संसद में लॉ मेकर की भूमिका में रहते हैं.
अमेरिका की संसद में 6 भारतवंशी हैं लॉ मेकर
अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के अमेरिकी नेताओं के बढ़ते राजनीतिक वर्चस्व, प्रतिनिधित्व और लॉ मेकिंग में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें समोसा कॉक्स कहा जाता है. अमेरिकी संसद में इस समय अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम, अमीश शाह और पिया डांडिया समोसा कॉक्स हैं, जो डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और मिडटर्म इलेक्शन 2026 भी लड़ रहे हैं. अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन और वर्जीनिया से दोबारा चुनावी रण में हैं.
वहीं अमीश शाह और पिया डांडिया एरिजोना से उम्मीदवार हैं. कैलिफोर्निया में डेमोक्रेट रो खन्ना के सामने भारतीय मूल के ही रिपब्लिकन पार्टी के रितेश टंडन हैं. वॉशिंगटन में डेमोक्रेट प्रमिला जयपाल के सामने रिपब्लिकन पार्टी के नीरव शेठ हैं. रिपब्लिकन के विवेक रामास्वामी ओहायो से गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार हैं, जिन्हें डेमोक्रेट एमी एक्टन टक्कर दे रहे हैं. अगर वे जीत जाते हैं तो बॉबी जिंदल और निक्की हेली के बाद भारतीय मूल के अमेरिका में तीसरे गवर्नर होंगे.
समोसा कॉक्स का भारत से क्या है कनेक्शन?
बता दें कि समोसा कॉक्स शब्द को अमेरिकन पॉलिटिक्स की स्पेशल टर्म बनाने का क्रेडिट इलिनॉय राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद राजा कृष्णमूर्ति को जाता है. साल 2018 में जब भारतीय मूल के अमेरिकी नेताओं का प्रतिनिधित्व अमेरिकी संसद में बढ़ा था तो यह शबब्द आया था. इसमें कॉक्स का मतलब उस ग्रुप से है, जिसके सदस्य राजनेता होने नाते राजनीतिक मुद्दों के लिए मिलकर काम करते हैं. वहीं समोसा इंडियन फूड है, जो अकसर चाय के साथ दोस्तों संग फास्ट फूड के तौर पर खाया जाता है. भारतीय संस्कृति और खान-पान की विशेष पहचान है. इसलिए समोसा शब्द का इस्तेमाल करके उन्होंने अमेरिकी की संसद में भारतीय मूल के सांसदों एक पहचान दी.
अमेरिकी संसद में समोसा कॉकस कौन-कौन?
बता दें कि जनवरी 2025 में अमेरिका की 119वीं कांग्रेस का गठन हुआ था, जिसमें डेमोक्रेटिक पार्टी से भारतीय मूल के 6 सांसद थे. पेशे से डॉक्टर अमी बेरा कैलिफोर्निया से सांसद हैं. साल 2013 से वे लगातार सांसद बनते आ रहे हैं. रो खन्ना कैलिफोर्निया से सांसद हैं और टेक्नोलॉजी, इकोनॉमी और इंडस्ट्रियल पॉलिस में रुचि रखते हैं. प्रमिला जयपाल वॉशिंगटन से सांसद हैं और अमेरिकी सांसद बनने वाली दक्षिण एशियाई मूल की पहली महिला हैं. राजा कृष्णमूर्ति इलिनॉय से सांसद हैं और एजुकेश, एम्पलॉयमेंट, टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों में रुचि रखते हैं. श्री थानेदार मिशिगन से सांसद हैं. सुहास सुब्रमण्यम वर्जीनिया से सांसद हैं.
क्या समोसा कॉक्स में फिर 6 सांसद हो सकते?
बता दें कि वर्तमान में अमेरिकी संसद में समोसा कॉकस के 6 सदस्य हैं और छहों सदस्य मिडटर्म इलेक्शन 2026 लड़ रहे हैं. राजा कृष्णमूर्ति ने मार्च 2026 में इलिनॉय सीट छोड़ अमेरिकी सीनेट के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जूलियाना स्ट्रैटन से हार गए थे. इसलिए वे अब इलिनॉय से सांसद नहीं रहेंगे. श्री थानेदार ने अगस्त 2026 में मिशिगन के 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव लड़ा था, जिन्हें डोनावन मैकिनी ने हराया. इसलिए थानेदार भी मिशिगन से सांसद नही रहे. 4 सांसद अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं. अमीश शाह एरिजोना और पिया दांडिया फ्लोरिडा से चुनाव मैदान में हैं. अगर अमीश शाह और पिया दांडिया चुनाव जीत जाते हैं तो समोमा कॉक्स में 6 सांसद हो सकते हैं.
अमेरिका की राजनीति में भारतीयों का प्रतिनिधित्व
बता दें कि अमेरिकी की कांग्रेस में भारतीय मूल के अमेरिकियों यानी समोसा कॉक्स का इतिहास काफी पुराना है. 1957 में डेमोक्रेटिक पार्टी से दलीप सिंह सौंद सांसद बने थे. साल 2025 में रिपब्लिकन से बॉबी जिंदल सांसद बने. साल 2012 में अमी बेरा अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में सांसद बने. 2017 में रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और राजा कृष्णमूर्ति सांसद बने. 2023 में श्री थानेदार और 2024 में सुहास सुब्रमण्यम सांसद बने तो समोसा कॉक्स की संख्या 6 हुई. अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के नेताओं की लगातार बढ़ती संख्या अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और चुनाव लड़ने की बढ़ती क्षमता का संकेत है.