पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) का खुलकर समर्थन किया है. इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए भारत, खाड़ी देशों और यूरोप के बीच सुरक्षित समुद्री व रेल नेटवर्क तैयार कर ऊर्जा संकट और दशकों पुरानी चुनौतियों से निपटा जा सकेगा. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने साफ कहा कि मिडिल ईस्ट के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को ईरानी चोकपॉइंट्स और नियंत्रण से बाहर निकालना बेहद जरूरी हो गया है.
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UNGA में बैठक के दौरान क्या बोले ट्रंप?
बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “पड़ोसी देशों में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों ने यह दिखा दिया है कि मिडिल ईस्ट के तेल ढांचे को ईरानी चौकियों से दूर ले जाना कितना जरूरी है. यही वजह है कि प्रशासन भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का पूरा समर्थन करता है. चाहे पाइपलाइन हो या कोई अन्य रास्ता, तेल को सुरक्षित बाहर निकालेगा. हम सब मिलकर उस चुनौती को खत्म करने की दहलीज पर हैं, जिसने इस क्षेत्र को दशकों से परेशान कर रखा है.”
क्या है IMEC प्रोजेक्ट?
भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) की शुरुआत सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी. इस बहुपक्षीय कनेक्टिविटी परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार, रेल और समुद्री कनेक्टिविटी को मजबूत करना है.
इस कॉरिडोर के दो हिस्से हैं, पहला ‘ईस्टर्न कॉरिडोर’ भारत के मुंद्रा पोर्ट को UAE के फुजैराह से जोड़ेगा. इसके बाद रेल व पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल के हाइफा पोर्ट तक माल पहुंचेगा. दूसरा ‘नॉर्दर्न कॉरिडोर’, जो हाइफा से फ्रांस, इटली और ग्रीस जैसे यूरोपीय देशों को जोड़ेगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य का सुरक्षित विकल्प
यह कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील जलमार्गों पर निर्भरता को कम करता है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान द्वारा तेल मार्गों को बाधित करने की धमकियों के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका के इस कड़े रुख और समर्थन से कॉरिडोर परियोजना को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.