Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान जंग की आग अब भारतीय विमान कंपनियों तक पहुंच गई है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने भारतीय एयरलाइंस की कमर तोड़ दी है. हालत यह है कि एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी बड़ी कंपनियों ने केंद्र सरकार को ‘SOS’ संदेश भेजकर गुहार लगाई है कि अगर तुरंत मदद नहीं मिली, तो वे अपना ऑपरेशन बंद करने की कगार पर पहुंच जाएंगी.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे एक पत्र में चेतावनी दी है कि विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में ‘अतार्किक वृद्धि’ की वजह से एयरलाइंस को ऐसा घाटा हो रहा है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है. बता दें, किसी भी एयरलाइन को चलाने के लिए कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है.
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एयरलाइंस का कहना है कि सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए तो एटीएफ की बढ़त को 15 रुपये प्रति लीटर पर सीमित रखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इसमें 73 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि कर दी गई है. इसके अलावा, रुपये की गिरती कीमत और 11% एक्साइज ड्यूटी ने आग में घी का काम किया है.
इस महासंकट की सीधी जड़ होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन है. यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है. ईरान ने इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया है, जिससे सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों से आने वाला तेल रुक गया है. सप्लाई रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं.
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FIA ने साफ कहा है कि अगर कीमतें कम नहीं हुईं, तो एयरलाइंस को अपने विमान खड़े करने पड़ेंगे. इसका सीधा मतलब है- बड़ी संख्या में उड़ानों का रद्द होना और हवाई टिकटों की कीमतों में भारी उछाल. लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिन बेहद मुश्किल भरे हो सकते हैं.
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एयरलाइंस ने सरकार से तत्काल वित्तीय मदद की मांग की है. साथ ही, उन्होंने ‘क्रैक बैंड’ मैकेनिज्म को फिर से लागू करने और उत्पाद शुल्क में अस्थायी छूट देने की अपील की है ताकि विमानन क्षेत्र को डूबने से बचाया जा सके. ‘क्रैक बैंड’ का मतलब ATF प्राइसिंग का एक तरीका है जो कच्चे तेल और ATF की कीमत के बीच बहुत ज्यादा अंतर को रोकता है.
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