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दुनिया

50 दिन बाद भी क्यों नहीं हुआ अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार? जानें असली वजह

सुप्रीम लीडर की मौत को डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन ईरान अब तक उन्हें सुपुर्द-ए-खाक नहीं कर पाया है. इसके पीछे की वजहें बेहद हैरान करने वाली हैं.

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Written By: Raja Alam Updated: Apr 19, 2026 21:17

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को करीब 50 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के एक साझा हवाई हमले में उनकी मौत हो गई थी जिसके बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ गया था. हैरानी की बात यह है कि ईरान सरकार ने अभी तक उनके जनाजे या दफनाने की जगह को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. सूत्रों का कहना है कि ईरानी अधिकारी युद्ध के माहौल में कोई बड़ा कार्यक्रम करने से बुरी तरह डरे हुए हैं और उन्हें सुरक्षा का बड़ा खतरा सता रहा है.

सड़कों पर उतरने से डर रही है सरकार

जब अयातुल्ला खामेनेई का निधन हुआ था तब तेहरान की सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था लेकिन अभी नजारा बिल्कुल अलग है. जानकारों का मानना है कि ईरान की सरकार इस समय बहुत कमजोर स्थिति में है और वह कोई बड़ा जोखिम लेने की हालत में नहीं है. युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी समेत कई बड़े अधिकारियों को ढेर कर दिया है जिससे सरकारी तंत्र में खौफ का माहौल है. सरकार को डर है कि अगर बड़ी भीड़ जमा हुई तो वह स्थिति को संभाल नहीं पाएगी और दोबारा हमले का खतरा बढ़ जाएगा.

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यह भी पढ़ें: ‘या तो डील मानो वरना…,’ बातचीत के बीच ट्रंप ने क्यों दी ईरान को ये खतरनाक धमकी?

क्या हुआ उन बड़े वादों का?

मार्च की शुरुआत में ईरानी मीडिया ने खबर दी थी कि खामेनेई के शरीर को उनके गृहनगर मशहद में दफनाया जाएगा और इसके लिए भव्य विदाई समारोह की तैयारी चल रही है. तेहरान के प्रार्थना ग्राउंड में तीन दिन के शोक कार्यक्रम का ऐलान भी किया गया था लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. मशहद जैसे बड़े शहर में भी कोई हलचल नहीं दिखी और श्रद्धांजलि सभाओं को लेकर चुप्पी साध ली गई है. देश में लंबे समय से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट और कड़े प्रतिबंधों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार जनता के बीच सच आने और उसके परिणामों से घबरा रही है.

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जंग के बीच कूटनीति का इम्तिहान

ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल दो हफ्ते का सीजफायर चल रहा है जो इस बुधवार को खत्म होने वाला है. पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत का पहला दौर नाकाम होने के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या दोबारा जंग शुरू होगी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर बुधवार तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से हमले शुरू कर सकता है. दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी अपने परमाणु अधिकारों को लेकर अड़े हुए हैं जिससे आने वाले दिन पूरे इलाके के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं.

First published on: Apr 19, 2026 08:43 PM

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