मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग खत्म होने के संकेत मिले हैं। क्योंकि ईरान और अमेरिका में शांति समझौता होने के आसार हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुरुआती समझौता किए जाने का दावा किया है। उन्होंने समझौते की शर्तों का जिक्र करते हुए एक इंटरव्यू दिया और अपने X हैंडल पर एक पोस्ट लिखी, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने री-पोस्ट किया और संकेत दिए कि सोमवार को दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं चेतावनी दी कि अगर शर्तें नहीं मानी गईं तो मिडिल ईस्ट में वैसा ही माहौल रहेगा, जैसा पिछले 3 महीने से है।
अराघची ने बताई शुरुआती समझौते की शर्तें
अराघची ने सरकारी न्यूज एजेंसी IRIB को दिए इंटरव्यू में अमेरिका के साथ परमाणु और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की ईरान की योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ पहले शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, इसमें मेंशन शर्तों को पूरा किया जाएगा, उसके बाद ही फाइनल समझौता किया जाएगा। अमेरिका को शुरुआती समझौता लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा। अगर 60 दिन के अंदर अमेरिका शर्तों को पूरी नहीं कर पाया तो मिडिल ईस्ट में स्थिति पहले जैसी रहेगी और अमेरिका से समझौते के दरवाजे बंद कर दिए जाएंगे।
सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मंजूरी अनिवार्य
अराघची ने कहा कि शुरुआती समझौते के मसौदे पर फैसला ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) में सर्वसम्मति से लिया जाएगा। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और हस्ताक्षर भी दूर से (रिमोटली) किए जाएंगे। परमाणु समझौते के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती समझौता लागू होने के बाद दूसरे चरण में परमाणु समझौते पर चर्चा करेंगे। हालांकि संवर्धित यूरेनियम पर ईरान का रुख स्पष्ट है कि इसे किसी दूसरे देश को सौंपा नहीं जाएगा और समझौते के अनुसार इसके साथ जो करना होगा, वह ईरान के अंदर ईरान खुद ही करेगा।
अमेरिका-ईरान के शुरुआती समझौते की शर्तें
अराघची ने कहा कि शुरुआती समझौते की सबसे पहली शर्त अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलना संभव नहीं है, लेकिन सर्विस फीस ली जाएगी। ईरान को अब तक हुए नुकसान का मुआवजा भी अमेरिका को देना होगा। होर्मुज पर ईरान और ओमान दोनों कंट्रोल रहेगा। इसके मैनेजमेंट के लिए दोनों देश मिलकर योजना बनाएंगे। ईरान की कोई भी जब्त संपत्ति फ्रीज नहीं होगी। लेबनान और हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध का अंत सभी मोर्चों पर होना चाहिए। ये शर्तें पूरी होंगी, तभी फाइनल डील होगी।
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग खत्म होने के संकेत मिले हैं। क्योंकि ईरान और अमेरिका में शांति समझौता होने के आसार हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुरुआती समझौता किए जाने का दावा किया है। उन्होंने समझौते की शर्तों का जिक्र करते हुए एक इंटरव्यू दिया और अपने X हैंडल पर एक पोस्ट लिखी, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने री-पोस्ट किया और संकेत दिए कि सोमवार को दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं चेतावनी दी कि अगर शर्तें नहीं मानी गईं तो मिडिल ईस्ट में वैसा ही माहौल रहेगा, जैसा पिछले 3 महीने से है।
अराघची ने बताई शुरुआती समझौते की शर्तें
अराघची ने सरकारी न्यूज एजेंसी IRIB को दिए इंटरव्यू में अमेरिका के साथ परमाणु और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की ईरान की योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ पहले शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, इसमें मेंशन शर्तों को पूरा किया जाएगा, उसके बाद ही फाइनल समझौता किया जाएगा। अमेरिका को शुरुआती समझौता लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा। अगर 60 दिन के अंदर अमेरिका शर्तों को पूरी नहीं कर पाया तो मिडिल ईस्ट में स्थिति पहले जैसी रहेगी और अमेरिका से समझौते के दरवाजे बंद कर दिए जाएंगे।
सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मंजूरी अनिवार्य
अराघची ने कहा कि शुरुआती समझौते के मसौदे पर फैसला ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) में सर्वसम्मति से लिया जाएगा। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और हस्ताक्षर भी दूर से (रिमोटली) किए जाएंगे। परमाणु समझौते के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती समझौता लागू होने के बाद दूसरे चरण में परमाणु समझौते पर चर्चा करेंगे। हालांकि संवर्धित यूरेनियम पर ईरान का रुख स्पष्ट है कि इसे किसी दूसरे देश को सौंपा नहीं जाएगा और समझौते के अनुसार इसके साथ जो करना होगा, वह ईरान के अंदर ईरान खुद ही करेगा।
अमेरिका-ईरान के शुरुआती समझौते की शर्तें
अराघची ने कहा कि शुरुआती समझौते की सबसे पहली शर्त अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलना संभव नहीं है, लेकिन सर्विस फीस ली जाएगी। ईरान को अब तक हुए नुकसान का मुआवजा भी अमेरिका को देना होगा। होर्मुज पर ईरान और ओमान दोनों कंट्रोल रहेगा। इसके मैनेजमेंट के लिए दोनों देश मिलकर योजना बनाएंगे। ईरान की कोई भी जब्त संपत्ति फ्रीज नहीं होगी। लेबनान और हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध का अंत सभी मोर्चों पर होना चाहिए। ये शर्तें पूरी होंगी, तभी फाइनल डील होगी।