सुबह के 9:40 बजे थे, जब अमेरिका और ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके दफ्तर में निशाना बनाया गया. तेहरान पर मिसाइलों की बारिश के बीच, खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद और एक पोते/पोती की भी मौत हो गई. इस हमले में ईरानी सरकार के कई बड़े अधिकारी भी मारे गए. दोनों पक्षों के बीच हमले शुरू हुए चार महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है. ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता, शीर्ष अधिकारियों और मिनाब हमलों में मारी गईं सौ से ज्यादा स्कूली छात्राओं की मौत का बदला लेने की कसम खाई, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ गया. लेकिन खामेनेई को अभी तक दफनाया नहीं गया है.
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खामेनेई को दफन करने में देरी क्यों?
मार्च 2026 से अब तक उनके अंतिम संस्कार की तारीखें कई बार बदली गईं. शनिवार को ईरान ने खामेनेई के दफनाने और सुपुर्द-ए-खाक़ की नई तारीखों का ऐलान किया. ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार को बताया कि तेहरान, कोम और मशहद में 6, 7 और 9 जुलाई को सुपुर्द-ए-खाक़ के कार्यक्रम होंगे और 9 जुलाई को उन्हें इमाम रजा की दरगाह में दफनाया जाएगा. ईरान ने खामेनेई को दफन करने के लिए मुहर्रम का वक्त चुना है. मुहर्रम शिया मुस्लिम कैलेंडर में शोक का पारंपरिक समय होता है. सबसे पहले खमेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की योजना 4 मार्च के लिए बनाई गई थी, लेकिन युद्ध की वजह से इसे टाल दिया गया था. इस्लामी कानूनों के मुताबिक, मौत के 24 घंटे के भीतर शव को दफनाना जरूरी है, लेकिन युद्ध जैसे हालात में देरी की गुंजाइश होती है.
पहले क्यों टला सुपुर्द-ए-खाक़?
AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बाद में कहा कि वो तीन दिन का अंतिम संस्कार कार्यक्रम मुहर्रम (इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना) की शुरुआत में आयोजित करने की योजना बना रहा था, जो जून की शुरुआत में होता. हालांकि, तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने फार्स समाचार एजेंसी को दिए एक बयान में कहा कि इस कार्यक्रम को मुहर्रम के शुरुआती 10 दिनों के बाद तक के लिए टाल दिया गया है, ताकि श्रद्धालु इमाम हुसैन का सालाना शोक पूरा कर सकें. इमाम हुसैन शिया समुदाय के सम्मानित शुरुआती नेता थे, जिनकी 680 ईस्वी में कर्बला की लड़ाई में हत्या कर दी गई थी. ईरान इंटरनेशनल की एक पिछली रिपोर्ट में कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से इसमें देरी हुई, क्योंकि ईरान ऐसे समय में राजकीय अंतिम संस्कार की योजना बना रहा है जब क्षेत्रीय तनाव बहुत ज्यादा है. अब 4 जुलाई से शुरू होने वाले छह दिवसीय शोक कार्यक्रम के दौरान तेहरान और बाकी प्रमुख शहरों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी. अंतिम चरण में 9 जुलाई को खामेनेई को दफनाया जाएगा.
ये भी पढ़ें: ‘यह कतई बर्दाश्त नहीं…’, ट्रंप ने होर्मुज में भारतीय जहाजों पर हमले के लिए ईरान पर लगाया इल्जाम
सुबह के 9:40 बजे थे, जब अमेरिका और ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके दफ्तर में निशाना बनाया गया. तेहरान पर मिसाइलों की बारिश के बीच, खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद और एक पोते/पोती की भी मौत हो गई. इस हमले में ईरानी सरकार के कई बड़े अधिकारी भी मारे गए. दोनों पक्षों के बीच हमले शुरू हुए चार महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है. ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता, शीर्ष अधिकारियों और मिनाब हमलों में मारी गईं सौ से ज्यादा स्कूली छात्राओं की मौत का बदला लेने की कसम खाई, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ गया. लेकिन खामेनेई को अभी तक दफनाया नहीं गया है.
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खामेनेई को दफन करने में देरी क्यों?
मार्च 2026 से अब तक उनके अंतिम संस्कार की तारीखें कई बार बदली गईं. शनिवार को ईरान ने खामेनेई के दफनाने और सुपुर्द-ए-खाक़ की नई तारीखों का ऐलान किया. ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार को बताया कि तेहरान, कोम और मशहद में 6, 7 और 9 जुलाई को सुपुर्द-ए-खाक़ के कार्यक्रम होंगे और 9 जुलाई को उन्हें इमाम रजा की दरगाह में दफनाया जाएगा. ईरान ने खामेनेई को दफन करने के लिए मुहर्रम का वक्त चुना है. मुहर्रम शिया मुस्लिम कैलेंडर में शोक का पारंपरिक समय होता है. सबसे पहले खमेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की योजना 4 मार्च के लिए बनाई गई थी, लेकिन युद्ध की वजह से इसे टाल दिया गया था. इस्लामी कानूनों के मुताबिक, मौत के 24 घंटे के भीतर शव को दफनाना जरूरी है, लेकिन युद्ध जैसे हालात में देरी की गुंजाइश होती है.
पहले क्यों टला सुपुर्द-ए-खाक़?
AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बाद में कहा कि वो तीन दिन का अंतिम संस्कार कार्यक्रम मुहर्रम (इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना) की शुरुआत में आयोजित करने की योजना बना रहा था, जो जून की शुरुआत में होता. हालांकि, तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने फार्स समाचार एजेंसी को दिए एक बयान में कहा कि इस कार्यक्रम को मुहर्रम के शुरुआती 10 दिनों के बाद तक के लिए टाल दिया गया है, ताकि श्रद्धालु इमाम हुसैन का सालाना शोक पूरा कर सकें. इमाम हुसैन शिया समुदाय के सम्मानित शुरुआती नेता थे, जिनकी 680 ईस्वी में कर्बला की लड़ाई में हत्या कर दी गई थी. ईरान इंटरनेशनल की एक पिछली रिपोर्ट में कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से इसमें देरी हुई, क्योंकि ईरान ऐसे समय में राजकीय अंतिम संस्कार की योजना बना रहा है जब क्षेत्रीय तनाव बहुत ज्यादा है. अब 4 जुलाई से शुरू होने वाले छह दिवसीय शोक कार्यक्रम के दौरान तेहरान और बाकी प्रमुख शहरों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी. अंतिम चरण में 9 जुलाई को खामेनेई को दफनाया जाएगा.
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