UN में रूस-यूक्रेन तत्काल युद्ध रोकने के प्रस्ताव पर वोटिंग में भारत गैरहाजिर, जानें क्यों बनाई दूरी?

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी बरसी पर यूक्रेन के बिना शर्त युद्धविराम के प्रस्ताव पर हुई वोटिंग से दूरी बनाने वाले 51 देशों में भारत भी शामिल रहा. प्रस्ताव के पक्ष में 107 देश आगे आए और विरोध में रूस और उसके सहयोगी जैसे बेलारूस, ईरान, उत्तर कोरिया समेत 12 देश शामिल रहे.

UNGA Resolution Ukraine

रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पेश ‘यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए समर्थन’ प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने परहेज किया. इस प्रस्ताव में रूस और यूक्रेन के बीच तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम का आह्वान किया गया था. 107 देशों ने पक्ष में मतदान किया, 12 ने विरोध किया और 51 देशों ने मतदान से परहेज किया. भारत ने एक बार फिर अपनी पुरानी रणनीति को बरकरार रखते हुए वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. भारत के अलावा चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, बहरीन, श्रीलंका और संयुक्त राज्य अमेरिका समेत प्रमुख देशों ने भी मतदान से दूरी बनाई.

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प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल था?

प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए अपनी अपील को दोहराया गया. प्रस्ताव में युद्धबंदियों के पूर्ण आदान-प्रदान, गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों की रिहाई और जबरन स्थानांतरित या निर्वासित किए गए सभी नजरबंदों और नागरिकों की वापसी की मांग शामिल थी.

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वोटिंग का पूरा गणित: किसके पक्ष में क्या रहा?

यूक्रेन में शांति बहाली के उद्देश्य से लाए गए इस प्रस्ताव पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय बंटा हुआ नजर आया. संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए इस मतदान में दुनिया के 107 देशों ने यूक्रेन में तत्काल रूसी सैन्य कार्रवाई रोकने और शांति बहाल करने के समर्थन में वोट दिया. भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा जिन्होंने न तो प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया और न ही विरोध में. भारत ने ‘एबस्टेन’ (दूरी बनाना) का विकल्प चुना. भारत के साथ-साथ 50 अन्य देशों ने भी इस वोटिंग से दूरी बनाई, जो वैश्विक कूटनीति के बदलते समीकरणों को दर्शाता है.

भारत ने क्यों बनाई दूरी?

भारत के इस रुख के पीछे गहरी कूटनीतिक वजहें मानी जा रही हैं. भारत शुरू से ही ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ पर जोर देता रहा है. रूस के साथ ऐतिहासिक रक्षा संबंध और पश्चिम के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बीच भारत संतुलन बनाना चाहता है. भारत का हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी विवाद का हल युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है. गौरतलब है कि पीएम मोदी ने पहले भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि ‘यह युद्ध का युग नहीं है.’ भारत का यह कदम इसी सोच का विस्तार माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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