ब्रिटेन-जर्मनी-आयरलैंड में क्यों सड़कों पर भीड़ और विरोध प्रदर्शन? भारत पर क्या पड़ेगा असर

Anti Migrant Protests in Europe: यूरोप के कई देशों ब्रिटेन-जर्मनी-आयरलैंड में प्रवासियों के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. ब्रिटेन, आयरलैंड और जर्मनी में सड़कों पर उतरे लाखों लोग प्रवासियों को बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं. जानिए इस तनाव के बीच वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों की स्थिति क्या है.

Anti-migrant protests in Europe

Photo Credit: AI

Anti Migrant Protests in Europe: यूरोप के कई प्रमुख देशों में इन दिनों प्रवासियों (इमिग्रेंट्स) के खिलाफ गुस्सा उबल रहा है. ब्रिटेन, आयरलैंड और जर्मनी जैसे देशों में दक्षिणपंथी संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि बाहरी देशों से आने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों को उनके देश से तुरंत बाहर निकाला जाए.

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ब्रिटेन और आयरलैंड में हिंसक झड़पें

ब्रिटेन में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है. यहां इंग्लिश डिफेंस लीग (EDL) जैसी संस्थाओं के नेतृत्व में निकाली गई रैलियों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अवैध घुसपैठियों के कारण उनके रोजगार और संसाधन खतरे में हैं. वहीं, आयरलैंड के बेलफास्ट में एक गंभीर चाकूबाजी की घटना के बाद अप्रवासियों के खिलाफ दंगे भड़क उठे हैं, जिसके बाद प्रशासन को भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा है. स्थानीय लोगों में सोशल मीडिया के जरिए यह भावना फैलाई जा रही है कि प्रवासियों की वजह से उनकी संस्कृति और जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) बदल रही है.

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जर्मनी में कड़े कानून की तैयारी

जर्मनी में भी अप्रवासन की समस्या को लेकर सियासत गरमा गई है. वहां की रूढ़िवादी पार्टियां (CDU/CSU) धुर-दक्षिणपंथी पार्टी (AfD) के साथ मिलकर प्रवासियों पर लगाम लगाने के लिए बेहद कड़ा कानून बनाने की तैयारी में हैं, जिसका संसद से लेकर सड़कों तक भारी विरोध हो रहा है. आर्थिक मंदी और घटते रोजगार के बीच पूरे यूरोप में यह भावना मजबूत हो रही है कि टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल शरणार्थियों के रहने और खाने पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए.

भारतीय प्रवासियों पर क्या होगा असर?

यूरोप में भड़की इस एंटी-माइग्रेंट लहर के बीच वहां रहने वाले भारतीय समुदाय में भी चिंता देखी जा रही है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि यूरोप में हो रहा यह विरोध मुख्य रूप से उन अवैध घुसपैठियों और शरणार्थियों के खिलाफ है जो बिना किसी विशेष हुनर (अनस्किल्ड) के अवैध रास्तों से वहां पहुंचे हैं. इसके विपरीत, ब्रिटेन और जर्मनी में मौजूद भारतीय मूल के ज्यादातर लोग डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी एक्सपर्ट और छात्र हैं, जो कानूनी तौर पर वहां रह रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं. इसके बावजूद, सड़कों पर चल रहे इस तनाव और नस्लीय भावना के कारण स्थानीय स्तर पर भारतीय पेशेवरों और छात्रों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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