क्या भारत का है हिंद महासागर? ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर US अटैक से क्यों छिड़ा विवाद

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना भारत के द्वार पर ईरान युद्ध ले आई. 90 प्रतिशत से ज्यादा भारत का व्यापार इसी महासागर से गुजरता है, इसलिए सुरक्षा अहम है.

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दुनिया के 7 महासागरों में से एक हिंद महासागर का नाम सुनते ही आपको भी लगता होगा कि इसपर भारत का मालिकाना हक है. हिंद महासागर में अमेरिकी सबमरीन द्वारा ईरानी युद्धपोत को डूबाने पर अब लोगों के मन में सवाल उठने लगा है कि क्या हिंद महासागर पर भारत का अधिकार है, अगर है तो अमेरिका कैसे भारत की इजाजत के बिना उसके महासागर में ईरानी युद्धपोत पर हमला कर सकता है? ईरान ने अमेरिका के इस हमले पर आक्रामक रुख अपनाया है.

ईरान के युद्धपोत IRIS डेना पर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले ने इस बहस को हवा दे दी है. बुधवार सुबह श्रीलंका के गल द्वीप के करीब 40 नॉटिकल मील दक्षिण में हुए इस हादसे ने भारत के रणनीतिक पिछवाड़े में तनाव बढ़ा दिया. अमेरिकी नौसेना ने ईरानी फ्रिगेट को टॉरपीडो से डुबो दिया, जो विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास के बाद लौट रही थी. विवाद यह है कि क्या भारत को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

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क्या भारत का है हिंद महासागर?


सबसे पहले स्पष्ट कर दें कि हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय महासागर है, जिसपर भारत का कोई अधिकार नहीं है. कुल मिलाकर, हिंद महासागर का नाम भारत के केंद्रीय स्थान पर पड़ा, मगर यह साझा जलक्षेत्र है. ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना अंतरराष्ट्रीय जल में था. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत महासागर को विभिन्न क्षेत्रों में बांटा गया है. भारत का क्षेत्रीय जल 12 नॉटिकल मील (करीब 22 किलोमीटर) तक सीमित है, जहां पूर्ण संप्रभुता है. उसके बाद 24 नॉटिकल मील तक सन्निकटस जोन है, जहां सीमा शुल्क और आवागमन नियम लागू होते हैं. असली दायरा एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) का है, जो 200 नॉटिकल मील (370 किलोमीटर) तक फैला हुआ.

दुनिया में 18वां सबसे बड़ा इकोनॉमिक जोन


भारत का ईईजेड दुनिया में 18वां सबसे बड़ा है जो कि 23 लाख वर्ग किलोमीटर का है. यहां प्राकृतिक संसाधनों जैसे तेल, गैस, खनिज और मछली पर विशेष अधिकार हैं. उदाहरणस्वरूप, अरब सागर में मुंबई हाई जैसे क्षेत्र भारत के ऊर्जा स्रोत हैं. लेकिन ईईजेड से आगे हाई सीज शुरू हो जाते हैं, जहां कोई देश मालिक नहीं. यहां नेविगेशन, उड़ान और मछली पकड़ने की आजादी सबको है. डेना घटना श्रीलंका के ईईजेड में हुई, मगर युद्धकालीन नियमों के तहत युद्धपोतों को पारित होने का अधिकार मिला.

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रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना भारत के द्वार पर ईरान युद्ध ले आई. 90 प्रतिशत से ज्यादा भारत का व्यापार इसी महासागर से गुजरता है, इसलिए सुरक्षा अहम है. चीन की पाकिस्तान और श्रीलंका में बंदरगाह बनाने की चुनौती के बीच भारत एंडमान-निकोबार में बेस मजबूत कर रहा है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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