क्या है HELIOS? अमेरिकी नेवी का नया लेजर हथियार, कैसे करता है काम, क्या खासियतें

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की है, जिसमें लेजर हथियार पहली बार बड़े स्तर पर तैनात किए गए हैं. इसका मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता, नौसेना, परमाणु कार्यक्रम के अवशेषों को नष्ट करना और खतरे को खत्म करना है.

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ईरान की ओर से जवाबी हमलों को देखते हुए अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत लेजर हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी किए गए वीडियो से इसकी पुष्टि हुई है. अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक पोत पर लगा नया हथियार हाई-एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैज़लर एंड सर्विलांस (HELIOS) सिस्टम हो सकता है. HELIOS सिस्टम कम दूरी की मिसाइलों के खिलाफ एक अभेद्य दीवार की तरह काम करता है, जो पारंपरिक हथियारों की तुलना में अधिक तेज और किफायती है. यूएस सेंट्रल कमांड की ओर से जारी किए वीडियो में यह सिस्टम ड्रोन को तबाह करते दिख रहा है. अमेरिकी नौसेना ने HELIOS के टेस्ट में 4 ड्रोन सफलतापूर्वक गिराए थे.

HELIOS क्या है?

न्यूयार्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार HELIOS एक 60-किलोवाट का हाई-एनर्जी लेजर हथियार है. इसे लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के लिए तैयार किया है. यह दुश्मन के छोटे जहाजों, नावों और अनमैन्ड एरियल व्हीकल को सीधे जलाकर नष्ट कर सकता है. इसकी सटीक लेजर बीम इंजन या सेंसर को पिघला देती है. यह ‘इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैज़लर’ तकनीक का उपयोग कर दुश्मन के ड्रोन या विमान के कैमरों और सेंसर्स को एक चकाचौंध भरी रोशनी से अंधा कर देता है, जिससे वे अपना रास्ता भटक जाते हैं और हमला नहीं कर पाते. इसमें शक्तिशाली लॉन्ग-रेंज सेंसर्स लगे हैं, जो समुद्र में दूर तक नजर रखने और दुश्मन की गतिविधियों का डेटा इकट्ठा करने में मदद करते हैं.

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आयरन बीम लेजर डिफेंस सिस्टम

इसके अलावा, इज़राइल ने अपनी नई आयरन बीम लेजर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया है. यह सिस्टम लेबनान बॉर्डर पर हिजबुल्लाह के रॉकेट्स को लॉन्च होते ही कुछ सेकंड में नष्ट कर रहा है. वीडियो में रॉकेट्स हवा में फटते दिखे हैं, जिसे विशेषज्ञ आयरन बीम से जोड़ रहे हैं. यह सिस्टम कम लागत में शॉर्ट-रेंज रॉकेट्स और ड्रोन को रोकने में सक्षम है, जहां पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर लाखों डॉलर खर्च करते हैं.

यूएस स्पेस फोर्स

यूएस स्पेस फोर्स की भूमिका भी अहम है. 2019 में स्थापित यह फोर्स इंफ्रारेड सेंसर्स वाले सैटेलाइट्स से ईरानी मिसाइल लॉन्च का पता लगाती है. लॉन्च होते ही हीट से ट्रैक कर मिसाइलों को पैट्रियट या अन्य सिस्टम से इंटरसेप्ट किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सैकड़ों ईरानी मिसाइलें इसी तकनीक से नष्ट की गई हैं. ऑपरेशन के शुरुआती 72 घंटों में अमेरिकी सेना ने 1,700 से ज्यादा टारगेट्स पर हमला किया. 200 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर नष्ट हुए, दर्जनों और काम करने लायक नहीं रहे. ईरान के खिलाफ 2,000 से ज्यादा मुनिशन इस्तेमाल हो चुके हैं, जिसमें B-2 और B-1 बॉम्बर्स ने गहरे अंदरूनी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक्स कीं. ईरानी नौसेना को भी भारी नुकसान हुआ है.

लेजर टेक्नोलॉजी इस युद्ध में गेम-चेंजर

हालांकि, मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, पहले 5 दिनों में 1,000 से ज्यादा नागरिक मारे गए, जिनमें 181 बच्चे 10 साल से कम उम्र के थे. न तो अमेरिका और न ही इज़राइल ने लेजर हथियारों के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन वीडियो और रिपोर्ट्स से यह साफ है कि लेजर टेक्नोलॉजी इस युद्ध में गेम-चेंजर साबित हो रही है. यह युद्ध ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ, जो अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई का नतीजा था.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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