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नेपाल पर एक नहीं, मंडरा रहे दो खतरे! चीन ने भी चेताया; बारिश बनी रेस्क्यू में विलेन

नेपाल को भारत समेत कई देशों ने राहत और बचाव दल भेजने का ऑफर दिया है. कई देशों और संस्थाओं ने अपनी खोज-बचाव टीम भेजने को कहा, जिस पर नेपाल सरकार ने कहा कि नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां इस काम के लिए सक्षम हैं.

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बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई. (Image - PTI)

नेपाल में लगातार हो रही बारिश ने जारी रेस्क्यू ऑपरेशन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गुरुवार शाम से ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश के चलते कई प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य रोकना पड़ा है. खास तौर पर नुवाकोट और बिदुर इलाके में फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक दिया गया है.

सबसे बड़ी चिंता, अब नेपाल-चीन सीमा से लगे ऊपरी इलाकों में बन रही नई झील को लेकर है. चीन की ओर से नेपाल को चेतावनी दी गई है कि सीमा के पास एक बैरियर लेक यानी मलबे से नदी का रास्ता रुकने के कारण बनी झील तेजी से भर रही है. चीन के मुताबिक अगले कुछ दिनों में इसमें बड़ी मात्रा में पानी पहुंच सकता है, जिससे इसके टूटने पर दोबारा अचानक बाढ़ आने का खतरा है.

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यह इलाका तिब्बत के केरुंग-ग्यिरोंग क्षेत्र के पास है और वहां से निकलने वाला पानी आगे नेपाल के नदी तंत्र को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में मौजूद लोगों तथा रेस्क्यू टीमों को अतिरिक्त सतर्क रहने को कहा है. लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड, नदी का जलस्तर बढ़ने और दोबारा फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है. यही वजह है कि राहत और बचाव दल भी अपनी सुरक्षा को देखते हुए कुछ इलाकों से पीछे हट रहे हैं.

दूसरा खतरा क्या?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंगभू ग्लेशियर भी चिंता का कारण बना हुआ है. अभी ग्लेशियर का एक हिस्सा ही ढहा है. गंगभू ग्लेशियर चिंताजनक स्थिति में है. सैटेलाइट इमेज में ढहान वाली खड़ी दीवार और ग्लेशियर के अलग होने वाले स्थान पर बड़ा दरार साफ दिख रही है.

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एक्सपर्ट्स ने बाकी ग्लेशियर को मध्यम जोखिम बताया है, लेकिन अगर भूकंप के झटके फिर आएं तो यह और गिर सकता है और बड़ी लहर बन सकती है.

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चीनी और नेपाली टीमें पास की झीलों की रडार सैटेलाइट से लगातार निगरानी कर रही हैं, क्योंकि भूकंप से झीलों को रोकने वाले मिट्टी-बांध कमजोर हो सकते हैं. अधिकारियों ने लेन्दे खोला, भोटेकोशी और त्रिशुली नदियों के नीचे आने वाले इलाके खतरे वाले बताए हैं और लोगों से सतर्क रहने को कहा है.

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कई देशों ने दिया मदद का ऑफर

नेपाल को भारत समेत कई देशों ने राहत और बचाव दल भेजने का ऑफर दिया है. कई देशों और संस्थाओं ने अपनी खोज-बचाव टीम भेजने को कहा, जिस पर नेपाल सरकार ने कहा कि नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां इस काम के लिए सक्षम हैं. भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने राहत टीमें भेजने की मदद मांगी थी लेकिन अनुमति नहीं दी गई.

क्यों ना कह रहा नेपाल

यह फैसला 2015 के भूकंप के अनुभव के कारण लिया गया. उस वक्त विदेशी टीमों की भीड़ और प्रतिस्पर्धा से समन्वय में दिक्कतें आई थीं. नेपाली सेना और पुलिस ने सरकार को ना कहने की सलाह दी है.

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नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम बनाई है. यह टीम खोज-बचाव, जानकारी की जांच और कांसुलर मदद का समन्वय करेगी और इसे एक अंडर-सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी नेतृत्व दे रहे हैं.

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मरने वालों की संख्या 469 हुई

बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई. आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रहने के बीच और शव बरामद किए गए. आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, चितवन से 178, नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग जिले से 33 शव बरामद किए गए हैं. इसी तरह तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं.

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अब तक 1,545 घायलों और फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है. इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है. तलाश और बचाव अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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