बाढ़ की चेतावनी देता चीन तो नेपाल में कम होता जान-माल का नुकसान? ड्रैगन के डैम पर उठ रही उंगली
Nepal Flash Flood: नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने सैंकड़ों जिंदगियां छीन ली है, ऐसे में आरोप लगाया जा रहा है कि अगर चीन ने वक्त पर चेतावनी दी होती तो इतनी तबाही नहीं मचती, क्योंकि तब लोगों को संभलने का मौका मिल जाता, इन आरोपों के बाद बीजिंग की तरफ से भी जवाब आया है.
Written By: Shariqul Hoda|Updated: Aug 27, 2026 14:31
Edited By : Shariqul Hoda|Updated: Aug 27, 2026 14:31
Share :
नेपाल में फ्लैश फ्लड (Photo-PTI)
---विज्ञापन---
Did China’s Dam Cause Flash Floods in Nepal: नेपाल-चीन बॉर्डर पर आए भयानक फ्लैश फ्लड ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चीन की तरफ से अगर पहले चेतावनी मिलती, तब क्या नेपाल में जान-माल का नुकसान कम हो सकता था? खबरों के मुताबिक, नेपाल और चीन के बॉर्डर वाले इलाकों में पानी, कीचड़ और मलबे के अचानक फ्लो की चपेट में आने से कम से कम 172 लोगों की मौत हो गई है.
नहीं मिली बाढ़ की चेतावनी
नेपाल के लोगों का कहना है कि रासुवागढ़ी-ग्यिरोंग क्रॉसिंग और ग्यिरोंग पोर्ट के आस-पास की फैसिलिटीज भी अफेक्ट हुईं. उनका तर्क है कि आपदा के इशारे शायद पहले ही मिल सकते थे, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को वक्त रहते वार्निंग दी जा सकती थी.
---विज्ञापन---
चीन पर उठे सवाल
‘नया पत्रिका’ के एक नेपाली जर्नलिस्ट परशुराम काफ्ले ने टाइम पर वार्निंग न मिलने की आलोचना करते हुए कहा कि अपने उत्तरी पड़ोसी की चिंताओं को दूर करने के बावजूद देश को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा. नेशनल प्लानिंग कमीशन के पूर्व वाइस चेयरमैन डॉ. गोविंद राज पोखरेल ने भी बॉर्डर पर बेहतर मॉनिटरिंग और वार्निंग सिस्टम की मांग की.
We have continually faced crises originating from their territory, while we continue to address all their concerns, necessary or unnecessary. Why must Nepal alone pay the price of one-sided love?
डॉ. गोविंद पोखरेल ने कहा कि एडवांस्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी से आने वाली आपदा के संकेत मिल सकते थे. उन्होंने बताया कि निचले इलाकों में रहने वाले लोग अचानक आई इस आपदा के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि कोई खास बारिश नहीं हुई थी, और यहां तक कि लोकल लोगों को चेतावनी देने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मी भी तेजी से बहते बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिमालयन बॉर्डर एरिया में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, भूस्खलन और दूसरी आपदाओं की निगरानी के लिए नेपाल और चीन के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत है.
---विज्ञापन---
I thought Chinese have better monitoring systems for GLOF in border region, but it seems not. They have also suffered heavy losses of life and properties. I think Nepal China must have strong monitoring and early warning systems in border areas regarding GLOF and flood @XHNews
नेपाल में चीनी दूतावास ने उन दावों को खारिज कर दिया है कि चीनी इलाके में कोई जियोलॉजिकल डिजास्टर डैम टूटा और उससे नेपाल में तबाही मची. इस आरोप को ‘फर्जी’ बताते हुए बीजिंग ने कहा कि 26 अगस्त को नेपाली इलाके में ग्लेशियर से जुड़ी कोई घटना या भूकंप जैसे हालात पैदा हुए, जिससे बॉर्डर के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड हुआ और लोगों की जान गई. चीन ने आपदा से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ‘सहयोग से जानें बचती हैं.’
अचानक आई बाढ़ की वजह क्या थी?
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटिग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने (Avalanche) से शायद यह आपदा आई. नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि रासुवागढ़ी से तकरीबन 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में एक ग्लेशियर के पास का हिस्सा टूटकर अलग हो गया था.
---विज्ञापन---
बर्फ और चट्टानों का ये मलबा शायद किसी ग्लेशियल झील में गिरा या किसी नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे पानी, बर्फ और मलबे का अचानक बहाव पैदा हुआ और यह लेन्डे खोला से होते हुए भोटे कोशी नदी में जा गिरा. हालांकि, शुरुआत में भूकंप को इसके लिए एक संभावित वजह माना जा रहा था, लेकिन USGS की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कोई अर्थक्वेक नहीं आया था. इसलिए, जमीन खिसकने की असल वजह का अभी भी पता लगाया जा रहा है.