फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा के खिलाफ अमेरिका में अब तक का सबसे बड़ा कानूनी ट्रायल शुरू हो गया है. अमेरिका के 29 राज्यों के एक समूह ने मेटा पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि कंपनी ने बच्चों और किशोरों को जानबूझकर अपने प्लेटफॉर्म्स की लत लगाई और उनके मानसिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर भारी मुनाफा कमाया. इस मामले में कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
इस मुकदमे का नेतृत्व कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी जैसे राज्य कर रहे हैं. अभियोजकों का आरोप है कि मेटा ने अपने ऐप्स में ‘लाइक बटन’ और ‘इनफिनिट स्क्रॉल’ जैसे फीचर्स ऐसे तैयार किए, जिससे कम उम्र के बच्चे स्क्रीन से बंधे रहें. सरकारी वकीलों ने कोर्ट में कहा कि मेटा का बिजनेस मॉडल बच्चों को बांधकर रखना, उनका डेटा जुटाना और जनता से खतरों को छिपाना रहा है. इसके अलावा, कंपनी पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों का निजी डेटा बिना माता-पिता की सहमति के जुटाने का भी आरोप है.
Meta को बड़ा झटका, बच्चों की सुरक्षा मामले में लगा ₹5000 करोड़ का जुर्माना
अमेरिकी राज्यों ने अदालत से मांग की है कि मेटा पर करीब 200 अरब डॉलर (लगभग 17 लाख करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया जाए और कंपनी को अपने ऐप्स के काम करने के तरीके में बुनियादी बदलाव करने का आदेश दिया जाए. कानूनी विशेषज्ञ इस पूरे मामले की तुलना 1990 के दशक में तंबाकू कंपनियों के खिलाफ हुई ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई से कर रहे हैं.
वहीं, मेटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. कंपनी के वकीलों का तर्क है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल और मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है. मेटा का कहना है कि वे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कई नए टूल्स लाते रहे हैं. इस मामले की सुनवाई करीब छह से आठ हफ्ते चलने की उम्मीद है.
इस कानूनी लड़ाई और अमेरिकी राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की पूरी कवरेज देखने के लिए NDTV World का यह वीडियो रिपोर्ट देख सकते हैं. यह वीडियो अमेरिकी राज्यों की ओर से मेटा पर लगाए गए आरोपों और 200 अरब डॉलर के इस ऐतिहासिक ट्रायल के मुख्य बिंदुओं को समझने में मदद करता है.
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