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Explainer: ‘मानसून’ शब्द कहां से आया, क्या है इसका इतिहास, कैसे बना ये ग्लोबल वेदर का टर्म?

Origin Of 'Monsoon' Word: बरसात के मौसम के दौरान हम 'मानसून' शब्द सबसे ज्यादा सुनते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये लफ्ज आखिर कहां से आया जो आज के वक्त में एक ग्लोबल टर्म बन चुका है.

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मुख्य बिंदु

  • ‘मानसून’ अरबी शब्द ‘मौसिम’ से आया है, जिसका अर्थ है मौसम.
  • बाद में पुर्तगाली नाविकों ने इसे ‘मोनसाओ’ (Monção) के रूप में अपनाया.
  • अंग्रेजी शब्द “मानसून” पुर्तगाली शब्द से विकसित हुआ.
  • मानसून का अर्थ हवाओं का मौसमी रूप से उलटना है, न कि सिर्फ बारिश.
  • मानसून सिस्टम कई महाद्वीपों में लाखों लोगों पर असर डालते हैं.

Where Does the Word ‘Monsoon’ Originate From: ‘मानसून’ शब्द का रिश्ता खास तौर से भारी मौसमी बारिश से है, भारत जैसे देशों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला लफ्ज है. हालांकि, इसकी शुरुआत कई सदियों पहले हुई थी और ये हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री व्यापार, भाषा और मौसम की निगरानी के लंबे इतिहास को बयां करता है.

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‘मानसून’ लफ्ज की शुरुआत कैसे हुई?

‘मानसून’ शब्द अरबी लफ्ज ‘मौसिम’ से आया है, जिसका मतलब है ‘मौसम’ या ‘साल का समय’. अरब नाविक इस वर्ड का इस्तेमाल उन मौसमी हवाओं के लिए करते थे जो हर साल खास समय पर अपनी दिशा बदलती थीं. इससे उन्हें अरब प्रायद्वीप, पूर्वी अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच व्यापारिक मार्गों पर सफर करने में मदद मिलती थी.

पुर्तगाल ने अपनाया

16वीं सदी में, पुर्तगाली एक्सप्लोरर ने इस अरबी शब्द को ‘मोनसाओ’ (Monção) के तौर पर अपनाया. जैसे-जैसे यूरोपीय व्यापारियों और औपनिवेशिक ताकतों ने एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाई, ये शब्द धीरे-धीरे अंग्रेजी भाषा में ‘मानसून’ के रूप में शामिल हो गया. वक्त के साथ, ये उन सीजनल विंड सिस्टम के लिए स्टैंडर्ड साइंटिफिक और मौसम से जुड़ा वर्ड बन गया जो बड़े क्षेत्रों में मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है.

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सिर्फ बारिश से लेना-देना नहीं

आम धारणा के उलट, मानसून का मतलब सिर्फ भारी बारिश नहीं है. मौसम विज्ञान में, मानसून का मतलब है हवाओं का मौसमी रूप से उलटना (दिशा बदलना), जो खास तौर से जमीन और महासागरों के गर्म होने में फर्क के कारण होता है. हवाओं के बदलने का ये पैटर्न अक्सर साल के एक हिस्से में भारी बारिश और दूसरे हिस्से में सूखा मौसम लाता है.

यह भी पढ़ें- चीन ने ‘आर्टिफिशियल सूरज’ बनाने की तरफ बढ़ाया कदम, दुनिया का सबसे बड़ा चुंबक हुआ तैयार

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इंडिया में मानसून का पैटर्न

भारत में मानसून के 2 अहम मौसम होते हैं. दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो जून और सितंबर के बीच आता है, देश की सालाना बारिश का तकरीबन 70-80% हिस्सा लाता है और खेती, पीने के पानी की आपूर्ति और हाइड्रोइलेक्ट्रक पॉवर जेनरेशन में मदद करता है. उत्तर-पूर्व मानसून, जो मुख्य रूप से अक्टूबर से दिसंबर तक सक्रिय रहता है, तमिलनाडु और दक्षिण-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश लाता है.

दुनिया ने अपनाया

आज, ‘मानसून’ शब्द का इस्तेमाल दुनिया भर में दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों जैसे क्षेत्रों में इसी तरह की सीजनल क्लाइमेट सिस्टम को बयां करने के लिए किया जाता है. वैज्ञानिक मानसून पैटर्न को स्टडी करते रहते हैं क्योंकि वो खेती, जल संसाधनों, आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन को प्रभावित करते हैं. अपनी अरबी जड़ों से लेकर अपने आधुनिक वैज्ञानिक अर्थ तक, ‘मानसून’ शब्द सदियों के कल्चरल एक्सचेंज को रिप्रेजेंट करता है और दुनिया के सबसे अहम मौसम से जुड़े शब्दों में से एक बना हुआ है.

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निष्कर्ष

‘मानसून’ शब्द का ऑरिजिन भाषा, व्यापार और विज्ञान के बीच गहरे संबंध को दिखाती है. जो शब्द शुरू में मौसम में बदलाव बताने वाला एक अरबी शब्द था, वो बाद में दुनिया भर में पहचाना जाने वाला मौसम विज्ञान का एक कॉन्सेप्ट बन गया. आज, कई देशों में खेती, पानी की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में मानसून बहुत अहम भूमिका निभाता है. इस शब्द का सही मतलब और इतिहास समझने से यह पता चलता है कि मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं है, ये हवाओं और मौसम का एक जटिल सिस्टम है जो अरबों लोगों की जिंदगी पर असर डालता है.

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First published on: Jul 01, 2026 04:58 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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