Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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मुंबई में एक तरफ जहां बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद अंधेरी सबवे से लेकर वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक पानी-पानी हो गए और मुंबईकर घुटनों तक भरे पानी में दफ्तर जाने को मजबूर दिखे, वहीं दूसरी तरफ मुंबई के घरों में नल सूखे पड़े हैं. यह मुंबई का सबसे बड़ा मानसूनी विरोधाभास है. शहर बाढ़ में डूब रहा है, लेकिन नागरिकों को पीने के पानी की किल्लत का डर सता रहा है.
मुंबई की सड़कों पर जो पानी जमा होता है, वह शहर के भीतर कंक्रीट और डामर के जंगल पर गिरने वाली तात्कालिक बारिश का नतीजा है. अत्यधिक बारिश के कारण शहर का ड्रेनेज सिस्टम चोक हो जाता है और पानी सड़कों पर जमा हो जाता है. यह पानी बहकर समुद्र में चला जाता है और पीने के काम नहीं आता.
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इसके विपरीत, मुंबई को रोजाना करीब 4,000 मिलियन लीटर पीने के पानी की सप्लाई करने वाली सात झीलें – भातसा, अपर वैतरणा, मोदक सागर, तंसा, मिडल वैतरणा, तुलसी और विहार मुंबई शहर से काफी दूर ठाणे, पालघर और नासिक जिलों में स्थित हैं. इन जलाशयों को भरने के लिए मुंबई शहर की बारिश नहीं, बल्कि इन जिलों के कैचमेंट एरिया में लगातार होने वाली बारिश की जरूरत होती है.
जलाशयों का पानी एक या दो दिन की भारी बारिश से नहीं बढ़ता. यह चार महीने के मानसून के दौरान धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है. बीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जून तक इन सातों झीलों में केवल 6.93 फीसदी उपयोगी लाइव स्टोरेज बचा था. तुलना के लिए, साल 2025 में इसी अवधि के दौरान इन झीलों में 39.5% पानी था, क्योंकि तब मानसून समय से पहले आ गया था. इस साल मानसून देरी से आया, जिससे झीलें पहले ही खाली हो चुकी थीं.
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जब तक इन झीलों में पानी आने की रफ्तार, शहर को सप्लाई होने वाले 4000 मिलियन लीटर पानी की रफ्तार से अधिक नहीं हो जाती, तब तक जल स्तर दबाव में रहेगा. यही वजह है कि बीएमसी ने मई से ही शहर में 10% पानी की कटौती लागू कर रखी है और कमर्शियल यूजर्स पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं.
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साफ है कि मुंबई में मानसून तो आ गया है और सड़कें भी डूब गई हैं, लेकिन जब तक झीलों के कैचमेंट एरिया में हफ्तों तक लगातार और भारी बारिश नहीं होती, तब तक मुंबईकरों को पानी की किल्लत का सामना करना ही पड़ेगा.
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