देश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार बिजली वितरण व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव करने जा रही है. केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस नई योजना पर चर्चा हुई. अब एक ही इलाके में एक से अधिक बिजली कंपनियां अपनी सेवाएं दे सकेंगी. जिस तरह लोग अपने मोबाइल के लिए अपनी पसंद का सिम कार्ड चुनते हैं, ठीक उसी तरह अब बिजली सप्लायर भी चुन सकेंगे. सरकार का मानना है कि इस कदम से बिजली क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. कंपनियों के बीच होड़ होने से लोगों को सस्ती दर पर बेहतर और लगातार बिजली मिल सकेगी.
नया नेटवर्क बिछाए बिना मिलेगी बेहतर सर्विस
इस पूरी योजना की सबसे खास बात यह है कि नई कंपनियों को अलग से खंभे या तार बिछाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नई बिजली कंपनियां पहले से मौजूद नेटवर्क का ही इस्तेमाल करेंगी. इसके बदले वे तय शुल्क यानी व्हीलिंग चार्ज का भुगतान करेंगी. इससे नई लाइनें बिछाने में होने वाला भारी खर्च बचेगा और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा फायदा उठाया जा सकेगा. राज्य विद्युत नियामक आयोग इस प्रक्रिया के नियम बनाएगा ताकि सभी कंपनियों को बराबरी का मौका मिले. इसके साथ ही पुरानी कंपनियों और उनके कर्मचारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा.
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मुंबई मॉडल से पूरे देश के उपभोक्ताओं को फायदा
यह व्यवस्था मुंबई में पहले से ही सफलता के साथ चल रही है. वहां के लोग लंबे समय से अपनी पसंद की बिजली कंपनी चुन रहे हैं. सरकार अब इस मॉडल को पूरे देश में लागू करना चाहती है. नियम के मुताबिक कोई भी कंपनी सिर्फ फायदे वाले इलाकों को चुनकर पिछड़े इलाकों को छोड़ नहीं सकती है. सभी कंपनियों को हर वर्ग के लोगों को बिजली देनी होगी. इस बड़े बदलाव से बिजली कंपनियों का कामकाज बेहतर होगा और नई तकनीक देखने को मिलेगी. यह फैसला आम जनता को बड़ी राहत देने वाला साबित होगा.
देश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार बिजली वितरण व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव करने जा रही है. केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस नई योजना पर चर्चा हुई. अब एक ही इलाके में एक से अधिक बिजली कंपनियां अपनी सेवाएं दे सकेंगी. जिस तरह लोग अपने मोबाइल के लिए अपनी पसंद का सिम कार्ड चुनते हैं, ठीक उसी तरह अब बिजली सप्लायर भी चुन सकेंगे. सरकार का मानना है कि इस कदम से बिजली क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. कंपनियों के बीच होड़ होने से लोगों को सस्ती दर पर बेहतर और लगातार बिजली मिल सकेगी.
नया नेटवर्क बिछाए बिना मिलेगी बेहतर सर्विस
इस पूरी योजना की सबसे खास बात यह है कि नई कंपनियों को अलग से खंभे या तार बिछाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नई बिजली कंपनियां पहले से मौजूद नेटवर्क का ही इस्तेमाल करेंगी. इसके बदले वे तय शुल्क यानी व्हीलिंग चार्ज का भुगतान करेंगी. इससे नई लाइनें बिछाने में होने वाला भारी खर्च बचेगा और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा फायदा उठाया जा सकेगा. राज्य विद्युत नियामक आयोग इस प्रक्रिया के नियम बनाएगा ताकि सभी कंपनियों को बराबरी का मौका मिले. इसके साथ ही पुरानी कंपनियों और उनके कर्मचारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा.
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मुंबई मॉडल से पूरे देश के उपभोक्ताओं को फायदा
यह व्यवस्था मुंबई में पहले से ही सफलता के साथ चल रही है. वहां के लोग लंबे समय से अपनी पसंद की बिजली कंपनी चुन रहे हैं. सरकार अब इस मॉडल को पूरे देश में लागू करना चाहती है. नियम के मुताबिक कोई भी कंपनी सिर्फ फायदे वाले इलाकों को चुनकर पिछड़े इलाकों को छोड़ नहीं सकती है. सभी कंपनियों को हर वर्ग के लोगों को बिजली देनी होगी. इस बड़े बदलाव से बिजली कंपनियों का कामकाज बेहतर होगा और नई तकनीक देखने को मिलेगी. यह फैसला आम जनता को बड़ी राहत देने वाला साबित होगा.