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दिल्ली के करीब बने इस बांध पर फिर मंडराया खतरा! मानसून में यमुना में बाढ़ का अंदेशा

Alipur Embankment: दिल्ली से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर बागपत में बना अलीपुर तटबंध को लेकर स्थानीय लोगों में फिक्र बढ़ गई है, क्योंकि कुछ साल पहले इसके टूटने से इलाके में बाढ़ आ गई थी. हालांकि प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक चेतावनी जारी नहीं की है.

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Alipur Embankment In Danger: यूपी के बागपत जिले में अलीपुर तटबंध एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है. स्थानीय लोगों को डर है कि ठीक से रखरखाव न होने के कारण मॉनसून के मौसम में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. बारिश शुरू होने और आने वाले हफ्तों में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए, स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से बिना देरी किए मरम्मत और सफाई का काम करने की अपील की है.

2023 में आई थी बाढ़

जुलाई 2023 में इस तटबंध का एक हिस्सा टूट गया था, जिससे यमुना का बाढ़ का पानी आस-पास के गांवों और गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी इंडस्ट्रियल एरिया के कुछ हिस्सों में फैल गया था. उस समय, हथिनीकुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था. अधिकारियों के मुताबिक, एक जंगली जानवर की तरफ बनाए गए बिल से पानी का रिसाव शुरू हुआ, जिससे तटबंध कमजोर हो गया और इससे पहले कि इमरजेंसी टीमें कुछ कर पातीं, वो टूट गया.

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इन गांवों में भर गया था पानी

इस टूट-फूट के कारण बागपत के सुभानपुर समेत कई गांवों में जबरदस्त बाढ़ आ गई थी. ट्रोनिका सिटी की सैकड़ों फैक्ट्रियों में भी पानी घुस गया, जिससे हजारों मजदूर फंस गए थे. पूजा कॉलोनी, राम पार्क, बदरपुर खादर, जैन कॉलोनी, मीरपुर और पचारा जैसे रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. लोगों को जरूरी सामान की कमी का सामना करना पड़ा और बाढ़ वाली सड़कों पर आने-जाने के लिए उन्हें ट्रैक्टर और अन्य वाहनों पर निर्भर रहना पड़ा.

3 करोड़ में हुई थी मरम्मत

इस घटना के बाद राज्य सरकार ने डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी और तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने तटबंध के टूटने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया. बाद में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई. 2023 की बाढ़ के बाद, प्रशासन ने तटबंध की मरम्मत की और लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से उस पर एक सड़क बनाई. 2024 और 2025 के मॉनसून सीजन से पहले एहतियाती रखरखाव और सफाई का काम भी किया गया था.

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स्थानीय लोगों में डर

हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि बारिश का मौसम शुरू होने के बावजूद इस साल कोई खास मरम्मत या सफाई नहीं की गई है. उन्हें डर है कि अगर यमुना का जलस्तर फिर से तेजी से बढ़ता है, तो आस-पास के गांवों और दिल्ली-एनसीआर एरिया के कुछ हिस्सों को वैसी ही बाढ़ की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.

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प्रशासन ने क्या कहा?

इन चिंताओं पर रिएक्शन देते हुए सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रजनीश सिंह ने कहा कि नियमित निरीक्षण और गश्त जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि फंड उपलब्ध होने पर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की जाएगी और भरोसा दिलाया कि निगरानी टीमें सतर्क रहेंगी. विभाग के मुताबिक, अभी यमुना नदी के लिए बाढ़ की कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं है.

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निष्कर्ष

अलीपुर तटबंध बागपत और दिल्ली-NCR के आस-पास के गांवों के लिए बाढ़ से बचाव का एक अहम ढांचा है. जैसे-जैसे मॉनसून आगे बढ़ रहा है, 2023 जैसी बाढ़ की स्थिति को दोबारा होने से रोकने के लिए वक्त पर मरम्मत, लगातार निगरानी और बचाव के लिए रखरखाव बहुत जरूरी है. हालांकि अधिकारियों ने नियमित जांच और भविष्य में मरम्मत के काम का भरोसा दिलाया है, लेकिन निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि तटबंध को मजबूत करने और जान-माल, घरों, उद्योगों और खेती की जमीन को नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए जल्द कार्रवाई की जाएगी.

Frequently Asked Questions

स्थानीय निवासियों को चिंता है कि मॉनसून से पहले तटबंध की ठीक से मरम्मत या सफाई नहीं की गई है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
तटबंध टूटने से यमुना का बाढ़ का पानी बागपत के गांवों और गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी औद्योगिक इलाके में भर गया था.
तटबंध की मरम्मत की गई, उसके ऊपर एक सड़क बनाई गई और इस विफलता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई.
अधिकारियों का कहना है कि नियमित गश्त के जरिए तटबंध की निगरानी की जा रही है और जरूरी बजट जारी होने के बाद मरम्मत का काम किया जाएगा.
सिंचाई विभाग के अनुसार, अभी यमुना नदी में पानी के खतरनाक स्तर को लेकर कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं है.
First published on: Jul 03, 2026 06:18 PM

End of Article

About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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