14 अगस्त को देश विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के जरिए 1947 के बंटवारे की त्रासदी को याद कर रहा है. लेकिन उत्तर प्रदेश में इस मौके पर सियासत भी तेज हो गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ और अयोध्या में दिए अपने बयानों में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. उनके बयान में इतिहास के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति की झलक भी दिखाई दी. लखनऊ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि 1947 में सत्ता की लालसा की वजह से देश का विभाजन हुआ. उन्होंने कहा कि अगर उस समय कांग्रेस ने मजबूती दिखाई होती तो देश का बंटवारा नहीं होता.
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अयोध्या में संभल और राम जन्मभूमि का जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि अगर उस दौर में सरदार वल्लभभाई पटेल या नरेंद्र मोदी जैसा मजबूत प्रधानमंत्री होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता. इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाने के साथ मौजूदा नेतृत्व की तुलना भी सामने रखी. अयोध्या में महंत परमहंस रामचंद्र दास की पुण्य स्मृति से जुड़े कार्यक्रम में भी योगी आदित्यनाथ ने हिंदू एकता और सनातन का मुद्दा उठाया. उन्होंने संभल के हरिहर मंदिर, अयोध्या की राम जन्मभूमि और बाबरी विवाद का जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के बंटे होने का फायदा आक्रांताओं को मिला. उन्होंने कहा, ”हम बंटे थे और इसीलिए कटे थे.” सीएम योगी का संदेश हिंदू समाज की एकता और सनातन की मजबूती पर फोकस रहा.
2027 के चुनाव की सियासत पर नजर
योगी के इस बयान का दूसरा राजनीतिक संदेश भी है. बीजेपी जहां राष्ट्रवाद, सनातन और हिंदुत्व को अपना मजबूत वैचारिक आधार बना रही है, वहीं 2027 से पहले समाजवादी पार्टी PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश में है. सपा की सोशल इंजीनियरिंग में नए सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश भी दिखाई दे रही है. ऐसे में बीजेपी का सवाल- सनातन और राष्ट्रवाद और समाजवादी पार्टी का सवाल- सामाजिक न्याय और PDA. क्या 2027 की चुनावी लड़ाई इसी वैचारिक टकराव में बदलने जा रही है?
कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना
योगी के बयान पर कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया है. कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी आजादी और विभाजन के इतिहास को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी के पास आज के जनता से जुड़े सवालों का जवाब नहीं है, इसलिए हिंदू-मुसलमान और विभाजन जैसे मुद्दों को सामने लाया जा रहा है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या 14 अगस्त का मंच सिर्फ विभाजन की त्रासदी को याद करने का मंच था या फिर उत्तर प्रदेश में 2027 की वैचारिक लड़ाई का पहला बड़ा अध्याय भी यहीं से खुल रहा है? बीजेपी के पास हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के साथ सनातन का नैरेटिव है. सपा के पास PDA और सामाजिक न्याय का समीकरण और कांग्रेस के पास संविधान और सेक्युलरिज्म का मुद्दा यानी 2027 की लड़ाई सिर्फ वोटों की नहीं नैरेटिव की भी लड़ाई होगी.
(Input By: Manas Srivastava)
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