यूजीसी नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का बड़ा ऐलान, 22 मार्च से सांसदों के घेराव की चेतावनी

जयपुर में करणी सेना के नेतृत्व में सवर्ण महापंचायत में यूजीसी के नए नियमों का विरोध तेज. 22 मार्च से देशभर में सांसदों और विधायकों के घेराव की चेतावनी, आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी.

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जयपुर में करणी सेना के नेतृत्व में सवर्ण समाज ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जोरदार विरोध किया. महापंचायत में साफ चेतावनी दी गई कि अगर फैसला वापस नहीं हुआ तो 22 मार्च से देशभर में सांसदों और विधायकों का घेराव किया जाएगा.

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जयपुर में हुआ सवर्ण महापंचायत का शक्ति प्रदर्शन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में सवर्ण समाज की बड़ी महापंचायत आयोजित की गई. रामलीला मैदान के सामने आयोजित इस महापंचायत में हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया.
इस महापंचायत में केंद्र सरकार को साफ संदेश दिया गया—यूजीसी के नए प्रावधान वापस लो, वरना 22 मार्च से देशभर में जनप्रतिनिधियों का घेराव होगा.

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यूजीसी के खिलाफ करणी सेना के नेतृत्व में जयपुर में सवर्ण समाज की महापंचायत हुई. हालांकि कार्यक्रम के लिए रामलीला मैदान में जगह देने की मांग की गई लेकिन वहां पर पहले ही कार्यक्रम के चलते उसके ठीक सामने बने मैदान में महापंचायत की आयोजन की सशर्त अनुमति दी गई.

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जयपुर से विरोध का शंखनाद

जयपुर में यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज ने बड़ा शंखनाद कर दिया है. अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिनिधियों, साधु-संतों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में महिलाओं ने महापंचायत में भाग लिया.
सभा में साफ कहा गया कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो 22 मार्च के बाद देशभर में सांसदों और विधायकों का घेराव किया जाएगा. इतना ही नहीं, आने वाले चुनावों में भी राजनीतिक विरोध की रणनीति पर संकेत दिए गए.

राजपूत करणी सेना के प्रमुख महिपाल मकराना ने यूजीसी की नई गाइडलाइन को सवर्ण समाज के खिलाफ “काला कानून” बताते हुए कहा कि यह युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द फैसला वापस नहीं लिया गया, तो देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा.

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महापंचायत में उठे बड़े सवाल

महापंचायत में यह मुद्दा भी जोर-शोर से उठा कि सवर्ण समाज से चुने गए जनप्रतिनिधि समाज की आवाज सरकार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं. वक्ताओं ने कहा कि जो वर्ग बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है, उसी के खिलाफ नीतियां लाई जा रही हैं—जिसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है.

देशभर में आंदोलन की तैयारी

सवर्ण समाज ने ऐलान किया है कि 22 मार्च को सुबह 10 से 11 बजे के बीच देशभर में प्रदर्शन होंगे. इस दौरान लोग अपने-अपने क्षेत्रों में सांसदों और विधायकों के आवासों पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराएंगे. संगठनों का कहना है कि जब तक यूजीसी के नए नियम पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

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प्रतीकात्मक एकजुटता का प्रदर्शन

महापंचायत के अंत में लोगों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और मोबाइल फ्लैश लाइट जलाकर एकजुटता का संदेश दिया.

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सुप्रीम कोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट ने नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाई हुई है. कल इस पर फिर सुनवाई होनी है. हालांकि सवर्ण समाज इसे “अधूरी जीत” मान रहा है और पूरी वापसी तक संघर्ष जारी रखने की बात कह रहा है
बहरहाल,जयपुर से उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप लेती दिख रही है. 22 मार्च को क्या होता है और सरकार का अगला कदम क्या होगा—इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं.

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