महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दलबदल और बगावत की आहट सुनाई देने लगी है. शिवसेना (UBT) के सांसदों की वफादारी को लेकर चल रही अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. रविवार को मुंबई में हुई पार्टी सांसदों की बैठक के दौरान ठाकरे ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी को भी पार्टी में रहने के लिए मजबूर नहीं करेंगे.
बगावत की अटकलों पर उद्धव का कड़ा रुख
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है, तो वे उसे रोकने के लिए दबाव नहीं डालेंगे. उन्होंने साल 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें उस वक्त भी विद्रोह की भनक बहुत पहले लग गई थी, लेकिन उन्होंने किसी पर रुकने का दबाव नहीं डाला.
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क्या बोले उद्धव ठाकरे?
उन्होंने कहा, 'आज मेरा दिन नहीं हो सकता है, लेकिन कल निश्चित रूप से मेरा है. तब तक, हमें सहना और झेलना होगा.' साथ ही ठाकरे ने कहा कि जिन्होंने बालासाहेब की शिवसेना छोड़ी है, वे अंततः पछताएंगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी.
40 विधायकों की बगावत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे उस समय भी सब जानते थे, लेकिन उन्होंने किसी के खिलाफ कोई जांच नहीं खोली और न ही दबाव डाला. अगर कोई पहले से ही जाना चाहता है, तो वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं. मैं केवल उन्हें शुभकामनाएं दूंगा.
यह भी पढ़ें : उद्धव ठाकरे ने फेल कर दी बगावत! मीटिंग में जुड़े 9 सांसद, संजय राउत बोले-हमारे नेता बिकाऊ नहीं
सांसदों की गैर-मौजूदगी ने बढ़ाई हलचल
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तब तेज हुई जब रविवार की बैठक में शिवसेना (UBT) के 9 में से केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे. अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल बैठक में शामिल हुए, जबकि ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर और संजय देशमुख वर्चुअली शामिल हुए थे. इनके अलावा सांसद संजय जाधव ने फोन पर बात की और बाद में मिलने का आश्वासन दिया है.
इसके साथ ही मीडिया में एक कथित 'ऑपरेशन टाइगर' की खबरें भी सामने आई हैं, जो संकेत देती हैं कि उद्धव ठाकरे के गुट से दलबदल कराने की कोशिशें की जा रही हैं.
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संजय राउत और आदित्य ठाकरे ने अटकलों को किया खारिज
सांसदों की वफादारी पर उठ रहे सवालों के बीच संजय राउत और आदित्य ठाकरे ने इसे अफवाह बताया है. राउत का कहना है कि सभी सांसद शिवसेना (UBT) के साथ मजबूती से खड़े हैं. हालांकि, शिंदे गुट और विपक्ष की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि कई सांसद नेतृत्व से खुश नहीं हैं और उनके संपर्क में हैं.
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दलबदल और बगावत की आहट सुनाई देने लगी है. शिवसेना (UBT) के सांसदों की वफादारी को लेकर चल रही अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. रविवार को मुंबई में हुई पार्टी सांसदों की बैठक के दौरान ठाकरे ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी को भी पार्टी में रहने के लिए मजबूर नहीं करेंगे.
बगावत की अटकलों पर उद्धव का कड़ा रुख
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है, तो वे उसे रोकने के लिए दबाव नहीं डालेंगे. उन्होंने साल 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें उस वक्त भी विद्रोह की भनक बहुत पहले लग गई थी, लेकिन उन्होंने किसी पर रुकने का दबाव नहीं डाला.
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क्या बोले उद्धव ठाकरे?
उन्होंने कहा, ‘आज मेरा दिन नहीं हो सकता है, लेकिन कल निश्चित रूप से मेरा है. तब तक, हमें सहना और झेलना होगा.’ साथ ही ठाकरे ने कहा कि जिन्होंने बालासाहेब की शिवसेना छोड़ी है, वे अंततः पछताएंगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी.
40 विधायकों की बगावत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे उस समय भी सब जानते थे, लेकिन उन्होंने किसी के खिलाफ कोई जांच नहीं खोली और न ही दबाव डाला. अगर कोई पहले से ही जाना चाहता है, तो वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं. मैं केवल उन्हें शुभकामनाएं दूंगा.
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सांसदों की गैर-मौजूदगी ने बढ़ाई हलचल
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तब तेज हुई जब रविवार की बैठक में शिवसेना (UBT) के 9 में से केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे. अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल बैठक में शामिल हुए, जबकि ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर और संजय देशमुख वर्चुअली शामिल हुए थे. इनके अलावा सांसद संजय जाधव ने फोन पर बात की और बाद में मिलने का आश्वासन दिया है.
इसके साथ ही मीडिया में एक कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की खबरें भी सामने आई हैं, जो संकेत देती हैं कि उद्धव ठाकरे के गुट से दलबदल कराने की कोशिशें की जा रही हैं.
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संजय राउत और आदित्य ठाकरे ने अटकलों को किया खारिज
सांसदों की वफादारी पर उठ रहे सवालों के बीच संजय राउत और आदित्य ठाकरे ने इसे अफवाह बताया है. राउत का कहना है कि सभी सांसद शिवसेना (UBT) के साथ मजबूती से खड़े हैं. हालांकि, शिंदे गुट और विपक्ष की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि कई सांसद नेतृत्व से खुश नहीं हैं और उनके संपर्क में हैं.