कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने मंगलवार को राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से 2.06 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने को ‘चिंताजनक’ बताया और इस मामले में जांच के साथ सत्यापन कराए जाने की मांग की है. विपक्षी दल द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम को सौंपे गए एक पत्र में राज्य में जारी एसआईआर पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि इससे बड़ी संख्या में मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं.
कांग्रेस ने निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
पत्र में उसने दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की अवधि को दो महीने के लिए और बढ़ाने की मांग की है. पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चोकलिंगम से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा. पार्टी ने प्रशासनिक खामियों, त्रुटिपूर्ण प्रपत्रों और नोटिस देने में देरी करने का आरोप लगाया है. उसने कहा कि यह पुनरीक्षण अभियान प्रमुख त्योहारों की अवधि के साथ मेल खा रहा है.
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SIR से पहले कितने थे महाराष्ट्र में मतदाता?
कांग्रेस ने कहा कि इस मामले में तत्काल सुधारात्मक उपाय किए जाने की आवश्यकता है, ताकि पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न छूटें. पार्टी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया से पहले राज्य में कुल 9,78,54,049 मतदाता थे, जिनमें से 2,06,88,487 मतदाताओं (21.14 प्रतिशत) को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरे और अन्य (एएसडीडीओ) श्रेणियों में डाल दिया गया है. इसने दावा किया कि विसंगतियों के कारण या 2002 की मतदाता सूची से नाम का मिलान न हो पाने के कारण लगभग 1,22,24,007 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे.
कांग्रेस ने वर्ष 2024 के विधानसभा चुनावों और 31 अगस्त, 2026 के बीच राज्य में 2.06 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने को ‘अभूतपूर्व और चिंताजनक’ करार दिया है. पार्टी ने इन नामों को हटाए जाने की गहन जांच कराने के साथ-साथ इनका भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है.
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