मुंबई में फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने और बिहार के बेगूसराय निवासी ऋतिक की कथित संलिप्तता की बात सामने आने के बाद एक बार फिर बिहार का गैंगस्टर कनेक्शन चर्चा में है. बताया जा रहा है कि ऋतिक करीब दो महीने पहले ही मुंबई गया था. घरवालों को यही जानकारी थी कि वह कमाने के लिए मुंबई गया है. लेकिन सवाल सिर्फ ऋतिक का नहीं है. इससे पहले बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग के मामलों में भी बिहार से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं. आखिर बिहार के युवाओं का दूसरे राज्यों में सक्रिय गैंगस्टर गिरोहों से संपर्क कैसे बन रहा है? क्या इसके पीछे शूटरों की भर्ती, हथियारों की तस्करी और स्थानीय आपराधिक गिरोहों का नेटवर्क काम कर रहा है?
बिहार से गैंगस्टर नेटवर्क तक
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित बिहार कनेक्शन की पड़ताल करें तो बेगूसराय, सीतामढ़ी, मोतिहारी, बेतिया और गोपालगंज जैसे जिलों के नाम सामने आते हैं. इन जिलों से जुड़े कई संदिग्धों की गिरफ्तारी और हथियार तस्करी के मामलों ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है. जनवरी 2026 में पटना में पुलिस की कार्रवाई के दौरान कथित गैंग सदस्यों के साथ मुठभेड़ और चार लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी. गिरफ्तार लोगों में परमानंद यादव को गिरोह का कथित बिहार प्रभारी बताया गया था.
मुजफ्फरपुर में दो कथित शार्प शूटर गिरफ्तार
बिहार में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई का एक और मामला मुजफ्फरपुर से सामने आया. यहां डीआईयू की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर सीतामढ़ी रोड पर एक बस से सुनील बारोलिया और शहनवाज शाहिद को गिरफ्तार किया.
बताया गया कि दोनों नेपाल भागने की फिराक में थे. पुलिस के अनुसार, सुनील मूल रूप से राजस्थान के जयपुर का निवासी है, जबकि शहनवाज सीतामढ़ी का रहने वाला है और रोहतक में रह रहा था. दोनों हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई मामलों में वांछित बताए गए हैं. गिरफ्तारी के बाद हरियाणा पुलिस को सूचना दी गई और उनसे पूछताछ की गई.
गोपालगंज में फरार गुर्गों पर इनाम
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए गोपालगंज पुलिस ने तीन फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया था. राजस्थान के राहुल रावत और भूपेंद्र सिंह रावत पर 50-50 हजार रुपये, जबकि एसके मीणा उर्फ मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई थी.
गोपालगंज के एसपी स्वर्ण प्रभात के मुताबिक, बिहार एसटीएफ और पुलिस की टीमें इनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थीं. पुलिस ने आम लोगों से भी इनके बारे में सूचना देने की अपील की थी. तीनों के नाम विदेशी हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले में सामने आए थे.
विदेशी हथियारों की तस्करी का कनेक्शन
22 जुलाई को गोपालगंज के बलथरी चेकपोस्ट पर कुचायकोट पुलिस ने नागालैंड नंबर की एक बस से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक, उनके पास से ऑस्ट्रिया निर्मित चार ग्लॉक पिस्टल और आठ मैगजीन बरामद किए गए थे. गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के बोवारी गांव निवासी शंतनु शिवम और राजस्थान के अजमेर निवासी कमल राव शामिल थे. पूछताछ के बाद एसटीएफ की मदद से 24 जुलाई को राजस्थान के अजमेर जिले के दिनेश सिंह रावत को भी गिरफ्तार किया गया था.
इस कार्रवाई ने बिहार के रास्ते हथियारों की कथित तस्करी और दूसरे राज्यों के आपराधिक नेटवर्क से संभावित संपर्कों की जांच को अहम बना दिया.
बिहार के शूटरों से कैसे जुड़ा लॉरेंस बिश्नोई गैंग?
अब सवाल उठता है कि बिहार के शूटर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के संपर्क में कैसे आए?
बताया जाता है कि लॉरेंस बिश्नोई के बिहार कनेक्शन में सीतामढ़ी के गैंगस्टर विकास कालिया की अहम भूमिका रही है. दावा किया जाता है कि विकास कालिया और लॉरेंस बिश्नोई की मुलाकात तिहाड़ जेल में हुई थी. इसके बाद दोनों के गिरोहों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर उनके आपराधिक नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ने लगे.
आरोप है कि विकास कालिया ने बिहार के कुछ शूटरों को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जोड़ा. इसके बदले बिहार के आपराधिक गिरोहों तक हथियार पहुंचाने का नेटवर्क विकसित हुआ. हालांकि, इस कथित गठजोड़ और विकास कालिया की भूमिका की पुष्टि के लिए आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों के साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे.
शूटर, हथियार और पनाहगाह का नेटवर्क?
बिहार में कथित गैंग सदस्यों की गिरफ्तारी और विदेशी हथियारों की बरामदगी से कई सवाल खड़े होते हैं. क्या दूसरे राज्यों में वारदात करने वाले अपराधियों को बिहार में पनाह मिलती रही है? क्या स्थानीय गिरोहों के जरिए शूटरों की भर्ती और हथियारों की आपूर्ति होती है? और क्या जेलों में बने संपर्क आगे चलकर संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले लेते हैं?
इन सवालों का जवाब केवल गिरफ्तारियों से नहीं, बल्कि हथियारों के स्रोत, आरोपियों के आपसी संपर्क, वित्तीय लेन-देन और जांच में सामने आए सबूतों से मिल सकता है.
मुंबई में फायरिंग के मामले से लेकर मुजफ्फरपुर में कथित शूटरों की गिरफ्तारी और गोपालगंज में हथियारों की बरामदगी तक, बिहार का नाम अलग-अलग आपराधिक मामलों में सामने आया है. इन घटनाओं ने दूसरे राज्यों के गैंगस्टरों और बिहार के स्थानीय आपराधिक नेटवर्क के बीच संभावित संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
आखिर बिहार के युवाओं को इन गिरोहों से कौन जोड़ रहा है? विकास कालिया की कथित भूमिका कितनी अहम रही? हथियारों की तस्करी का नेटवर्क कहां तक फैला है? और क्या पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ पाएगी?
इन सवालों के जवाब जांच के नतीजों से सामने आएंगे. फिलहाल, जरूरी है कि हर आरोप की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले युवाओं को अपराध के जाल से बचाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं.