मध्य प्रदेश के मंडला जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही उजागर करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. इलाज के लिए अस्पताल ले जाए जा रहे 21 साल के एक मरीज की एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने की वजह से तड़प-तड़पकर मौत हो गई. बेबस मां-बाप अपने इकलौते सहारा को अपनी ही गोद में दम तोड़ते देखते रह गए और एंबुलेंस में एक-एक सांस के लिए तरसते बेटे को बचा नहीं सके.
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान अजीत बरैया (21 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बम्हनी थाना क्षेत्र के सुनेहरा गांव का रहने वाला था. अजीत का मंडला जिला अस्पताल में नियमित रूप से डायलिसिस चल रहा था. 27 जुलाई को अचानक उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस बुलाई.
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रास्ते में ही खत्म हो गई सांसों की डोर
अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलिंडर खाली हो गया. ऑक्सीजन का सहारा छूटते ही अजीत की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और एंबुलेंस के अंदर ही उसने अपने माता-पिता की गोद में अंतिम सांस ली. घटना के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया पर इस दर्दनाक मंजर का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें रोते-बिलखते माता-पिता अपने बेबस बेटे को संभाले नजर आ रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. परिजनों ने दोषी एंबुलेंस स्टाफ और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
अस्पताल में भी नहीं मिली ऑक्सीजन
मृतक युवक के पिता ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पिता का कहना है कि जब उनके बेटे को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी, तब वे उसे लेकर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुंचे थे. आरोप है कि वहां बेहद गंभीर स्थिति होने के बावजूद मरीज को ऑक्सीजन नहीं दी गई. इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही एंबुलेंस की ऑक्सीजन खत्म हो गई.
1 घंटे देर से पहुंची एंबुलेंस
पीड़ित पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जब उन्होंने इमरजेंसी में कॉल किया तो एंबुलेंस करीब एक घंटे की देरी से आई. देरी से पहुंची एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था भी पूरी नहीं थी. मंडला जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में अचानक सिलिंडर से ऑक्सीजन खत्म हो गई, जिससे युवक की तड़पकर मौत हो गई.
‘रास्ते में ऑक्सीजन न खत्म होती तो बच जाता बेटा’
रोते हुए पिता ने कहा, ‘मेरा बेटा एंबुलेंस के अंदर एक-एक सांस के लिए तड़प रहा था. अगर एंबुलेंस समय पर आती और रास्ते में उसकी ऑक्सीजन खत्म न हुई होती, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता और उसकी जान बच जाती.’ इस घटना ने सरकारी अस्पतालों और एंबुलेंस सेवाओं की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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