झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार एक बार फिर आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत की मेज पर आने को तैयार हो गई है. राज्य सरकार ने आंदोलनरत छात्रों को नए सिरे से बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, जिसे छात्र प्रतिनिधियों ने स्वीकार कर लिया है. गौरतलब है कि रांची में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन पिछले 23 दिनों से लगातार जारी है. रविवार को छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला और विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं.
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सरकार का रुख और आश्वासन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में कहा था कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. सरकार का कहना है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए छात्रों और शिक्षकों से सुझाव भी मांगे गए हैं.
20 अगस्त को घेराव की चेतावनी
छात्र नेताओं ने साफ किया है कि वे कानूनी सलाहकारों की मौजूदगी में सरकार से बात करेंगे, लेकिन अगर उनकी जायज मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. छात्रों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा.
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र संगठनों की मुख्य मांगें हैं, JSSC-CGL परीक्षा और विवादित JPSC परीक्षाओं को रद्द किया जाए. पूरी भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की जांच स्वतंत्र एजेंसी (CBI) या निष्पक्ष न्यायिक समिति से कराई जाए. भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार कर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर का सख्ती से पालन हो.
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