करम पर्व पर झारखंड के नेताओं ने दी शुभकामनाएं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले- प्रकृति और संस्कृति से जुड़ा है पर्व

करम पर्व के मौके पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं. जानें पर्व का महत्व.

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करम पर्व के अवसर पर झारखंड के नेताओं ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी. (Photo-ANI)

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झारखंड में मंगलवार को करम पर्व मनाया जा रहा है. इस मौके पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई नेताओं ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं. करम पर्व को प्रकृति, कृषि, भाई-बहन के रिश्ते और सामाजिक एकता से जुड़ा महत्वपूर्ण आदिवासी त्योहार माना जाता है.

राज्यपाल ने सुख-शांति और समृद्धि की कामना की

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर करम पर्व की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि करम पूजा प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक एकता का पर्व है. उन्होंने लोगों के जीवन में खुशी, शांति, समृद्धि और सुख-स्वास्थ्य की कामना की.

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सीएम सोरेन बोले- झारखंड की पहचान से जुड़ा है करम

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि करम पर्व झारखंड की पहचान और यहां की जीवनशैली से गहराई से जुड़ा हुआ है. उनके मुताबिक, यह पर्व प्रकृति और मानव जीवन के बीच के संबंध, भाई-बहनों के प्रेम, सामाजिक एकता और राज्य की समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है. सोरेन ने कहा कि जल, जंगल और जमीन सिर्फ जीवन का आधार नहीं हैं, बल्कि झारखंड की संस्कृति, परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों की विरासत भी हैं. उन्होंने कहा कि करम पर्व लोगों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है.

करम पूजा और लोक परंपराओं की खास पहचान

करम पर्व में करम पेड़ की डाली की पूजा की जाती है. अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रकृति से प्रार्थना की जाती है. इस दौरान बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना भी करती हैं. करम पर्व के दौरान अखड़ों में करम डाली स्थापित की जाती है. इसके बाद करम गीत, मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य के साथ सामूहिक रूप से उत्सव मनाया जाता है. यह झारखंड की लोक संस्कृति और सामुदायिक जीवन की झलक भी दिखाता है.

आधुनिकता के साथ परंपरा को बचाने का संदेश

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि विकास और आधुनिकता की राह पर आगे बढ़ते हुए भी अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा, लोकज्ञान और प्रकृति से जुड़े रिश्ते को मजबूत रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि पूर्वजों से मिली इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने करम पर्व को भाई-बहनों के पवित्र स्नेह और आपसी विश्वास से जुड़ा उत्सव भी बताया.

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बाबूलाल मरांडी ने भी दी शुभकामनाएं

विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी झारखंड के लोगों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पर्व भाई-बहनों के बीच अटूट प्रेम और स्नेह के रिश्ते का प्रतीक है.

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