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क्या है CJP का ‘साक्षी’ पोर्टल? पुलिस की मार खाए प्रदर्शनकारियों की करेगा मदद, जानें पूरी डिटेल

20 जुलाई को दिल्ली में सीजेपी के आंदोलन में दिल्ली पुलिस ने कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद बिहार से भी ऐसी कई खबरें सामने आई. वहीं, अब CJP ने दावा किया है कि सरकार ने संसद मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और जेल में बंद लोगों की रिहाई का भरोसा दिया है.

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20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े वीडियो, फोटो और अन्य डिजिटल सबूतों को इकट्ठा करने और उन्हें डिजिटली सुरक्षित रखने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ‘साक्षी’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. CJP का कहना है कि इस पहल का मकसद उन सभी लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जिनके पास संसद मार्च से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज हैं ताकि भविष्य में उन्हें प्रमाण के रूप में संरक्षित किया जा सके.

CJP नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं को लेकर देशभर से बड़ी संख्या में वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं. संगठन का दावा है कि इनमें कई ऐसी भी तस्वीरें हैं, जो प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की स्थिति और घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण हैं. इसी उद्देश्य से ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जहां नागरिक अपने डिजिटल साक्ष्य अपलोड कर सकेंगे.

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क्या है साक्षी प्लेटफॉर्म?

CJP द्वारा लॉन्च किए गए साक्षी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल हुए प्रदर्शनकारी छात्र पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो, फोटो यहां अपलोड कर सकेंगे. इसे इस्तेमाल करने के लिए एक गाइड भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है. CJP ने कहा कि गंभीर चोट पहुंचाने, पैलेट गन चलाने या अन्य किसी भी तरह की अभ्रदता और हमला करने वाले पुलिस कर्मियों और RAF कर्मियों की पहचान की जाएगी.

पार्टी के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाने वाला कंटेंट की मदद से लोगों की पहचान की जाएगी. इसके बाद आवश्यक होने पर इन्हें अदालतों, जांच एजेंसियों या मानवाधिकार संस्थाओं के सामने भी रखा जाएगा.

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बनाया जाएगा वकीलों का पैनल- सौरव दास

सीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और अलग-अलग राज्यों में उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए. पार्टी का कहना है कि इन परिस्थितियों में घटनाओं का प्रमाणिक दस्तावेजीकरण (Authentic documentation) जरूरी है. इसी कारण लोगों से अपील की गई है कि यदि उनके पास उस दिन से जुड़ा कोई वीडियो, फोटो या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड है तो उसे ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म पर शेयर करें. वहीं, सौरव दास ने यह भी कहा कि वेबसाइट पर जिला स्तर पर वकीलों का एक पैनल भी बनाया जाएगा, ताकि जिन छात्रों पर कार्रवाई हो रही है उन्हें तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके.

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गौरतलब है कि 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया था. इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ. कई स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज हुआ और अनेक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था. इस मामले को लेकर सरकार और सीजेपी के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है.

First published on: Jul 28, 2026 11:32 AM

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