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Bharat Nirman Summit 2026: 'लगा तिहाड़ जाना तय है..' अमेरिका से लौटे तो एयरपोर्ट पर अभिजीत दीपके के साथ क्या हुआ?

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने न्यूज 24 के ‘भारत निर्माण समिट 2026’ में पहली बार बताया कि जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से पहले अमेरिका से लौटने पर एयरपोर्ट पर उनके साथ क्या हुआ? लेटर साइन कराने से लेकर फोन नंबर लीक होने तक का किया खुलासा

जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से ठीक पहले अमेरिका से भारत लौटने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हुआ था, इसका पहली बार खुलासा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किया है. न्यूज 24 के ‘भारत निर्माण समिट 2026’ के मंच पर अभिजीत दीपके ने उस पूरे घटनाक्रम की परतें खोलीं, जिसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं थी. अभिजीत दीपके ने बताया कि जब मैं वापस भारत आया तो एयरपोर्ट पर मेरे साथ एक ऐसी घटना हुई,एयरपोर्ट पर कुछ स्टाफ मेरे पास आए और मुझे अपने साथ चलने को कहा. मैंने पूछा कि आप मुझे कहां ले जा रहे हैं? उन्होंने बताया कि वे एयरलाइंस के स्टाफ हैं, पुलिस वाले नहीं. इसके बाद मेरा इमिग्रेशन सिर्फ पांच मिनट में हो गया. मुझे हैरानी हुई, क्योंकि पहले जब भी मैं भारत आता था तो इमिग्रेशन में करीब एक घंटा लग जाता था. इसके बाद मुझे एयरपोर्ट के एक कमरे में ले जाया गया.

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लेटर साइन कराने पर हुआ शक

वहां मुझे बताया गया कि वे मुझे गिरफ्तार करने नहीं, बल्कि प्रदर्शन की अनुमति देने आए हैं. मुझे यह सुनकर काफी हैरानी हुई, क्योंकि मैंने तो कोई अनुमति मांगी ही नहीं थी. उन्होंने मुझे एक लेटर दिया और कहा कि इसे साइन कर दीजिए. जब मैंने लेटर देखा तो वह मेरे नाम से तैयार किया गया था. मैंने पूछा कि क्या इस बारे में मेरे वकीलों से बात की गई है? उन्होंने कहा कि नहीं, यह उनका स्टैंडर्ड फॉर्मेट है, जिसे मेरे नाम से तैयार किया गया है.

मुझे इस पर शक हुआ, इसलिए मैंने अपने प्रोफेसर को फोन करके लेटर दिखाया. उन्होंने साफ कहा कि इसे साइन मत करना, यह एक ट्रैप हो सकता है. उन्होंने सलाह दी कि मैं अपनी तरफ से एक अलग हाथ से लिखा हुआ लेटर दूं और उसमें अपनी शर्तों के साथ प्रदर्शन की अनुमति मांगूं. मैंने वैसा ही किया और पुलिस को अपना लेटर दे दिया. लेकिन पुलिस ने कहा कि उनके स्टैंडर्ड फॉर्मेट के अलावा किसी दूसरे लेटर के आधार पर अनुमति नहीं दी जा सकती. मैंने उनसे कहा कि अगर मैं अपनी तरफ से लिखकर दे रहा हूं और उसमें प्रदर्शन की बात साफ है तो फिर अनुमति देने में दिक्कत क्या है?

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सोशल मीडिया हैंडल पर सार्वजनिक किया नंबर

इसके बाद पुलिस अधिकारी कमरे में गए, आपस में बातचीत की और कुछ फोन कॉल किए. वापस आकर उन्होंने कहा कि मेरे दिए हुए लेटर के आधार पर अनुमति नहीं दी जा सकती. मैंने कहा कि अगर ऐसा ही है तो मुझे गिरफ्तार कर लीजिए, क्योंकि मैं इस तरह की प्रक्रिया में नहीं पड़ना चाहता. इसके बाद आखिरकार मुझे प्रदर्शन की अनुमति मिल गई. लेकिन इसके बाद एक और घटना हुई. मैंने जो फोन नंबर अपने लेटर में दिया था, उसे पुलिस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सार्वजनिक कर दिया और साथ ही मुझे तुरंत एयरपोर्ट से बाहर निकलने के लिए कहा गया.

इस दौरान पुलिस की नीति और एयरलाइंस की नीति के बीच भी टकराव की स्थिति बन गई. एयरलाइंस का कहना था कि हमारे यात्री हमारे ग्राहक हैं और उनके साथ हमारी अपनी प्रक्रिया है, जबकि पुलिस की तरफ से मुझे तुरंत बाहर निकलने के लिए कहा जा रहा था. कुल मिलाकर, एयरपोर्ट पर मेरी वापसी के दौरान अनुमति देने से लेकर लेटर साइन कराने और बाद में फोन नंबर सार्वजनिक करने तक कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्हें लेकर मुझे शुरू से ही संदेह होता रहा.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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