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बड़ा झटका! दिल्ली में महंगी होगी बिजली, 1 से 3.30% तक बढ़ सकता रेट, जानें क्यों और क्या है कंपनियों का प्लान?

Electricity Rate Hike: दिल्लीवासियों को जून में ज्यादा बिजली बिल भरना पड़ सकता है। क्योंकि दिल्ली की बिजली कंपनियां परचेज चार्ज वसूलने की तैयारी में हैं। दिल्ली के बिजली आयोग ने कंपनियों को चार्ज वसूलने की अनुमति दे दी है।

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दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का झटका लग सकता है। क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट और युद्ध का सीधा असर बिजली के उत्पादन पर पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर गैस, पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल के साथ-साथ कोयले के आयात और परिवहन की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे देश में कोयला और ईंधन महंगा हुआ, जिससे बिजली खरीद महंगी हो गई है। बिजली कंपनियों की लागत बढ़ गई है। कंपनियों को नुकसान और घाटे से बचाने के लिए बिजली की दरें बढ़ाने का फैसला किया गया है।

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दिल्ली में जून का बिजली बिल बढ़कर आएगा

दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने आज तीनों बिजली कंपनियों BRPL, BYPL और TPDDL को पावर पर्चेज एडजेस्टमेंट चार्ज (PPAC) वसूलने की अनुमति दे दी है। पहले यह चार्ज हर 3 महीने में वसूला जाता था, लेकिन अब यह हर महीने वसूला जाएगा। ऐसे में जून महीने में बिजली बिल बढ़कर आ सकता है। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जो 500 यूनिट से ज्यादा बिजली हर महीने खर्च करते हैं। 200 यूनिट और 200 से 400 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं का बिल सब्सिडी के कारण शून्य रहेगा।

कमर्शियल-इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को झटका

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में बिजली एक से 3.30 प्रतिशत महंगी हो सकती है। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (दुकानों और कारखानों) कस्टमरों के बिजली बिल में सीधे तौर पर 15% से 20% तक की भारी बढ़ोतरी होगी। 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वाले लोगों के अप्रैल और मई के जून में आने वाले बिजली बिल में 7 से 18 फीसदी तक अतिरिक्त सरचार्ज लग सकता है। बिजली बिल में दक्षिण दिल्ली में 17.94 प्रतिशत, पूर्वी दिल्ली में 17.43 प्रतिशत, उत्तर और पश्चिम दिल्ली में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।

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क्या है PPAC और क्यों बढ़ाया जा रहा है इसे?

पावर पर्चेज एडजेस्टमेंट चार्ज (PPAC) बिजली बनाने वाली कंपनियों के द्वारा बिजली खरीदने की लागत पूरी करने के लिए उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली फीस है। देश के 25 से ज्यादा राज्यों में यह चार्ज पहले से वसूला जा रहा है। बिजली कंपनियों (DISCOMs) को जनरेटर का पैसा समय पर चुकाना होता है। अगर PPAC न वसूला जाए तो कंपनियों को आय नहीं होगी, जिसके ब्याज का बोझ बिजली उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। इस बोझ को कंपनियां समय से चार्ज वसूलकर कम कर देती हैं। ऐसे में दोनों स्थितियों में आर्थिक बोझ आम लोगों पर ही पड़ेगा।

First published on: Jun 13, 2026 11:35 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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