बांकीपुर चुनाव में ‘लालू यादव’ से कैसे आगे निकले ‘नीतीश कुमार’? प्रशांत किशोर की सीट पर आया ‘दिग्गजों’ का नाम
Bankipur By Election: इंग्लिश के महान राइट और पोएट विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि 'नाम में क्या रखा है'. हालांकि ये बात कई बार गलत साबित होती है, क्योंकि एक जैसे नाम की वजह से अक्सर कंफ्यूजन पैदा होती है.
Written By: Shariqul Hoda|Updated: Aug 4, 2026 00:08
Edited By : Shariqul Hoda|Updated: Aug 4, 2026 00:08
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Prashant Kishor (Photo-X/@jansuraajonline)
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Nitish Kumar and Lalu Prasad Yadav In Bankipur Bypoll: प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतकर एक बड़ी राजनीतिक फतह हासिल की. इससे उनकी ‘जन सुराज’ पार्टी को पहली चुनावी जीत मिली और इस सीट पर BJP का 35 साल पुराना दबदबा खत्म हो गया. लेकिन अगर हम कहें कि उनका मुकाबला नीतीश कुमार और लालू यादव नाम के उम्मीदवारों से भी था तो शायद आप यकीन नहीं करेंगे.
बांकीपुर में लालू-नीतीश
बांकीपुर चुनाव के नतीजे ने एक अनोखा राजनीतिक पल भी पैदा किया. मुकाबले में 2 निर्दलीय उम्मीदवार ऐसे थे जिनके नाम बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे ही थे. हालांकि, इनमें से कोई भी उम्मीदवार बड़ा दावेदार नहीं बन पाया, लेकिन तकनीकी रूप से प्रशांत किशोर ने उसी चुनाव में बीजेपी के साथ-साथ इन दोनों को भी हराया.
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पीके की धमाकेदार जीत
प्रशांत किशोर ने वोटों की गिनती के सभी 36 राउंड में लगातार बढ़त बनाए रखी और आखिरकार भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराया. उन्हें 64,151 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 44,827 वोट मिले. आरजेडी कैंडिडेट रेखा कुमारी 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.
क्यों हुआ उपचुनाव?
ये उपचुनाव तब हुआ जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई थी. इस वजह से ये सीट बिहार के सबसे चर्चित चुनावी मुकाबलों में से एक बन गई थी. BJP ने इस उपचुनाव को एक हाई-प्रोफाइल लड़ाई माना और अपनी सबसे मज़बूत सीटों में से एक को बचाने की कोशिश में लगभग 40 स्टार प्रचारकों और एक बड़े संगठनात्मक नेटवर्क को मैदान में उतारा.
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प्रशांत किशोर क्यों जीते?
चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने रोजगार, शिक्षा और शासन जैसे मुद्दों पर फोकस किया. उन्होंने इस चुनाव को राज्य सरकार के कामकाज की जनता द्वारा की जा रही समीक्षा बताया और बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़कर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों को आकर्षित किया. उनके प्रचार अभियान में पूरे क्षेत्र में जनसभाएं, घर-घर जाकर लोगों से मिलना और बूथ लेवल पर लोगों को लामबंद करना शामिल था.
30 साल पुराना किला फतह
BJP के जबरदस्त प्रचार के बावजूद, किशोर बांकीपुर पर पार्टी की लंबे समय से चली आ रही पकड़ को तोड़ने में कामयाब रहे. इस जीत ने न सिर्फ ‘जन सुराज’ को पहली चुनावी कामयाबी दिलाई, बल्कि किशोर के लिए एक राजनीतिक रणनीतिकार से चुने हुए नेता बनने की दिशा में एक अहम पड़ाव भी साबित हुई, जिससे बिहार के बदलती राजनीतिक जमीन में उनकी स्थिति और मजबूत हुई.