कभी हार न मानने वाले बेन स्टोक्स ने आखिर क्यों मान ली हार? क्या भुला दिया जाएगा क्रिकेट का सबसे बड़ा ‘रॉकस्टार’?
Ben Stokes: खिलाड़ी चाहे किसी भी खेल का हो, एक बात जो सभी पर लागू होती है वो ये है कि खेल में कुछ खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं, तो कुछ खेल की आत्मा बन जाते हैं. इंग्लैंड के दिग्गज ऑलराउंडर और कप्तान बेन स्टोक्स यकीनन दूसरी कतार के खिलाड़ी थे. लगातार चोटों और मानसिक-शारीरिक थकान ने उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर होने पर मजबूर किया. लेकिन हेडिंग्ले का चमत्कार, 2019 वर्ल्ड कप का ऐतिहासिक फाइनल, 'बैज़बॉल' की क्रांति और हर मुश्किल में हमेशा लड़ते रहने का उनका जज़्बा वो किस्से हैं जो सिर्फ इंग्लैंड नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हमेशा याद रखे जाएंगे.
Ben Stokes Retirement: क्रिकेट में विदाई अक्सर तयशुदा होती है. पहले संन्यास की घोषणा, फिर फेयरवेल मैच और आखिर में भावनाओं का सैलाब. महेंद्र सिंह धोनी का 2014 के मेलबर्न टेस्ट के बाद लिया गया अचानक संन्यास आज भी भारतीय फैंस को याद है. अब कुछ ऐसी ही, लेकिन अलग कहानी बेन स्टोक्स ने लिखी. महज 35 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लैंड-न्यूज़ीलैंड के ट्रेंट ब्रिज टेस्ट के दौरान ही इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ने का ऐलान कर दिया.
करियर की आखिरी पारी में स्टोक्स ने 20 गेंदों पर 30 रन बनाए, हालांकि इंग्लैंड मैच और सीरीज़ दोनों हार गया. फिर भी उनके चेहरे पर हार का गम नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी का सुकून था जिसने 15 साल तक देश के लिए सब कुछ झोंकने के बाद अपनी शर्तों पर मैदान छोड़ा.
स्टोक्स की 'परफेक्शन' पर रहेंगे सवाल!
क्रिकेट में बेन स्टोक्स एक दिग्गज हैं, लेकिन इतिहास फिर भी उन्हें 'परफेक्ट' हीरो के तौर पर याद नहीं करेगा. विवादों के साथ उनका पुराना नाता रहा है. 25 सितंबर 2017 की शाम उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा तूफान आया था. तब इंग्लैंड के ही ब्रिस्टल में एक नाइटक्लब में हुए मारपीट विवाद के बाद स्टोक्स की गिरफ्तारी हुई थी. हालात यहां तक बिगड़ गए थे कि मुकदमेबाज़ी के बाद, स्टोक्स को ऐशेज़ जैसी बड़ी सीरीज़ से भी बाहर होना पड़ा था. क्रिकेट के बड़े-बड़े पंडितों ने तब उनका करियर लगभग खत्म मान लिया गया था.
कुछ दिन पहले भी लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान गस एटकिंसन के साथ वो नाइट क्लब गए जहां एक नया विवाद हुआ. लेकिन स्टोक्स की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने अपनी गलतियों से भागने के जगह उनका सामना किया. कोर्ट में खुद को बेदाग साबित किया और मैदान पर ऐसा प्रदर्शन किया कि विवाद उनके करियर का फुटनोट बनकर रह गए. बेन स्टोक्स ने साबित किया कि महान खिलाड़ी वही होता है, जो हर गिरावट के बाद पहले से ज्यादा ऊंचा उठे.
2016 में टी20 वर्ल्ड कप भारत में खेला गया था. फाइनल मैच के आखिरी ओवर में वेस्टइंडीज़ के कार्लोस ब्रैथवेट के चार लगातार छक्कों ने स्टोक्स को तोड़ दिया था. ईडन गार्डन्स पर घुटनों के बल बैठे, आंखों में आंसू लिए स्टोक्स की तस्वीर क्रिकेट इतिहास के सबसे दर्दनाक लम्हों में दर्ज हो गई.
लेकिन सिर्फ तीन साल बाद लॉर्ड्स में वही खिलाड़ी इंग्लैंड को पहला वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाला गेम चेंजर बन गया. बेन स्टोक्स की फाइनल मैच में खेली गई वो संघर्षपूर्ण पारी, सुपर ओवर और ऐतिहासिक जीत अब इतिहास में अमर हो चुका अनुभव है. सच्चाई तो ये है कि 2016 के टूटे हुए स्टोक्स से 2019 के वर्ल्ड चैंपियन स्टोक्स तक का सफर, शायद क्रिकेट की सबसे खूबसूरत 'रिडेम्पशन स्टोरी' कहा जा सकता है.
बरसों तक दी जाएगी हेडिंग्ले की मिसाल
स्टोक्स का क्रिकेट करियर लंबा रहा है, उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त भी अच्छी लंबी है. लेकिन अगर मुझसे पूछा जाए कि, 'मैं बेन स्टोक्स को उनकी किस पारी या मैच की वजह से हमेशा याद रखूंगा ?' तो यहां मेरा जवाब 2019 की ऐशेज़ सीरीज़ का हेडिंग्ले टेस्ट होगा. जहां स्टोक्स की खेली एक पारी ने उन्हें क्रिकेट इतिहास में अमर बना दिया. 359 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड 286 रन पर 9 विकेट गंवा चुका था. दूसरे छोर पर जैक लीच सिर्फ विकेट बचा रहे थे और स्टोक्स अकेले ऑस्ट्रेलिया पर टूट पड़े.
पैट कमिंस, जोश हेज़लवुड और नाथन लायन जैसे गेंदबाज़ों के खिलाफ उनकी 135 रन की नाबाद पारी सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की ऑल टाइम बेस्ट पारियों में से एक थी. इंग्लैंड की जीत के लिए लगाया वो विजयी चौका और उसके बाद स्टोक्स की दहाड़, आज भी मेरे ज़ेहन में असंख्य क्रिकेट फैंस की तरह गूंजती है.
मुझे याद है 2022 में जब बेन स्टोक्स को इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी दी गई थी, उस दौरान इंग्लिश टीम लगातार हार रही थी. लेकिन फिर स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम ने मिलकर 'बैज़बॉल' की शुरुआत की और टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा बदल दी. उनका टीम के लिए सिर्फ एक मंत्र या फॉर्मूला था, कि चाहे जो हो जाए अब ड्रॉ नहीं, सिर्फ जीत के लिए खेलना है. इसी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण था जब भारत के खिलाफ इंग्लैंड ने 378 रन का लक्ष्य महज़ 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया था. स्टोक्स ने दुनिया को दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट 5 दिन लंबा होने के बावजूद रोमांच से भरपूर हो सकता है.
अगर स्टोक्स भारतीय होते…
भारत में हम खिलाड़ियों को आंकड़ों से ज्यादा जज़्बे से याद रखते हैं. इसलिए बेन स्टोक्स की विदाई भी कहीं न कहीं अपना सा खालीपन छोड़ जाती है. ज़रा सोचिए, अगर स्टोक्स भारत के लिए खेलते? शायद कपिल देव, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली जैसे महान मैच विनर्स की कतार में उनका नाम लिया जाता. आज जब दुनियाभर में कई खिलाड़ी फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट को प्राथमिकता दे रहे हैं, तो स्टोक्स ने टेस्ट क्रिकेट के लिए आईपीएल के करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट छोड़ा.
वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया और हमेशा देश को पहले रखा. देश के लिए खेलने की खातिर वो ऐसी मिसाल बने जैसा भारत में भी गिने-चुने क्रिकेटर्स ही कर पाए. ऐसे खिलाड़ियों को सिर्फ सम्मान नहीं, श्रद्धा मिलती है. यकीनन अगर वो भारतीय क्रिकेटर होते तो वर्ल्ड क्रिकेट में उनका रूतबा और बड़ा हो जाता.
थका हुआ शरीर, क्रिकेट से फिर मोहब्बत!
बेन स्टोक्स के इंटरनेशनल करियर पर नज़र डालें तो उन्हें लगी लगातार चोटों का ज़िक्र करना लाज़िमी हो जाता है. घुटने की सर्जरी से लेकर हैमस्ट्रिंग की परेशानी और कभी कंधे की चोट. देखा जाए तो सिर्फ 35 की उम्र तक स्टोक्स का शरीर इंटरनेशनल क्रिकेट की कीमत चुका चुका था. उन्होंने स्वीकार किया कि लगातार दबाव का असर उनके परिवार और निजी जीवन पर भी पड़ रहा था. सस्पेंशन के दौरान डरहम के लिए खेलते हुए उन्हें क्रिकेट का वही पुराना आनंद फिर महसूस हुआ, जहां न कैमरों का शोर था, न करोड़ों उम्मीदों का बोझ. शायद तभी उन्होंने तय कर लिया कि अब नाम और शोहरत से ज्यादा खेल का सुकून चुनना है.
अपने करियर में बेन स्टोक्स सिर्फ 7000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन और 250 विकेट छोड़कर नहीं जा रहे. वो हेडिंग्ले का चमत्कार, 2019 वर्ल्ड कप की अमर कहानी, 2022 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की मैच जिताऊ पारी और 'बैज़बॉल' जैसी सोच छोड़कर जा रहे हैं. कुछ लोग शायद करियर के आखिरी पड़ाव पर हुए नाइटक्लब विवाद और टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड की लगातार हार को बेन स्टोक्स के संन्यास की वजह के तौर पर देखेंगे.
लेकिन मैं बस यहीं कहूंगा कि बेन स्टोक्स का संन्यास किसी दुखद अध्याय का अंत नहीं. ये संन्यास एक ऐसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का क्लाइमैक्स है, जिसके खत्म होने पर दर्शक उदास नहीं, खड़े होकर तालियां बजाते हैं. क्रिकेट को ऐसे खिलाड़ी बार-बार नहीं मिलते. बेन स्टोक्स सिर्फ इंग्लैंड के महान ऑलराउंडर नहीं थे, बल्कि उस दौर के आखिरी रॉकस्टार थे, जिन्होंने हर बार मैदान पर उतरकर यह भरोसा जगाया कि जब तक वे क्रीज़ पर हैं, मैच और कहानी दोनों अभी बाकी हैं.
Ben Stokes Retirement: क्रिकेट में विदाई अक्सर तयशुदा होती है. पहले संन्यास की घोषणा, फिर फेयरवेल मैच और आखिर में भावनाओं का सैलाब. महेंद्र सिंह धोनी का 2014 के मेलबर्न टेस्ट के बाद लिया गया अचानक संन्यास आज भी भारतीय फैंस को याद है. अब कुछ ऐसी ही, लेकिन अलग कहानी बेन स्टोक्स ने लिखी. महज 35 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लैंड-न्यूज़ीलैंड के ट्रेंट ब्रिज टेस्ट के दौरान ही इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ने का ऐलान कर दिया.
करियर की आखिरी पारी में स्टोक्स ने 20 गेंदों पर 30 रन बनाए, हालांकि इंग्लैंड मैच और सीरीज़ दोनों हार गया. फिर भी उनके चेहरे पर हार का गम नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी का सुकून था जिसने 15 साल तक देश के लिए सब कुछ झोंकने के बाद अपनी शर्तों पर मैदान छोड़ा.
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स्टोक्स की ‘परफेक्शन’ पर रहेंगे सवाल!
क्रिकेट में बेन स्टोक्स एक दिग्गज हैं, लेकिन इतिहास फिर भी उन्हें ‘परफेक्ट’ हीरो के तौर पर याद नहीं करेगा. विवादों के साथ उनका पुराना नाता रहा है. 25 सितंबर 2017 की शाम उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा तूफान आया था. तब इंग्लैंड के ही ब्रिस्टल में एक नाइटक्लब में हुए मारपीट विवाद के बाद स्टोक्स की गिरफ्तारी हुई थी. हालात यहां तक बिगड़ गए थे कि मुकदमेबाज़ी के बाद, स्टोक्स को ऐशेज़ जैसी बड़ी सीरीज़ से भी बाहर होना पड़ा था. क्रिकेट के बड़े-बड़े पंडितों ने तब उनका करियर लगभग खत्म मान लिया गया था.
कुछ दिन पहले भी लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान गस एटकिंसन के साथ वो नाइट क्लब गए जहां एक नया विवाद हुआ. लेकिन स्टोक्स की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने अपनी गलतियों से भागने के जगह उनका सामना किया. कोर्ट में खुद को बेदाग साबित किया और मैदान पर ऐसा प्रदर्शन किया कि विवाद उनके करियर का फुटनोट बनकर रह गए. बेन स्टोक्स ने साबित किया कि महान खिलाड़ी वही होता है, जो हर गिरावट के बाद पहले से ज्यादा ऊंचा उठे.
2016 में टी20 वर्ल्ड कप भारत में खेला गया था. फाइनल मैच के आखिरी ओवर में वेस्टइंडीज़ के कार्लोस ब्रैथवेट के चार लगातार छक्कों ने स्टोक्स को तोड़ दिया था. ईडन गार्डन्स पर घुटनों के बल बैठे, आंखों में आंसू लिए स्टोक्स की तस्वीर क्रिकेट इतिहास के सबसे दर्दनाक लम्हों में दर्ज हो गई.
लेकिन सिर्फ तीन साल बाद लॉर्ड्स में वही खिलाड़ी इंग्लैंड को पहला वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाला गेम चेंजर बन गया. बेन स्टोक्स की फाइनल मैच में खेली गई वो संघर्षपूर्ण पारी, सुपर ओवर और ऐतिहासिक जीत अब इतिहास में अमर हो चुका अनुभव है. सच्चाई तो ये है कि 2016 के टूटे हुए स्टोक्स से 2019 के वर्ल्ड चैंपियन स्टोक्स तक का सफर, शायद क्रिकेट की सबसे खूबसूरत ‘रिडेम्पशन स्टोरी’ कहा जा सकता है.
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बरसों तक दी जाएगी हेडिंग्ले की मिसाल
स्टोक्स का क्रिकेट करियर लंबा रहा है, उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त भी अच्छी लंबी है. लेकिन अगर मुझसे पूछा जाए कि, ‘मैं बेन स्टोक्स को उनकी किस पारी या मैच की वजह से हमेशा याद रखूंगा ?’ तो यहां मेरा जवाब 2019 की ऐशेज़ सीरीज़ का हेडिंग्ले टेस्ट होगा. जहां स्टोक्स की खेली एक पारी ने उन्हें क्रिकेट इतिहास में अमर बना दिया. 359 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड 286 रन पर 9 विकेट गंवा चुका था. दूसरे छोर पर जैक लीच सिर्फ विकेट बचा रहे थे और स्टोक्स अकेले ऑस्ट्रेलिया पर टूट पड़े.
पैट कमिंस, जोश हेज़लवुड और नाथन लायन जैसे गेंदबाज़ों के खिलाफ उनकी 135 रन की नाबाद पारी सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की ऑल टाइम बेस्ट पारियों में से एक थी. इंग्लैंड की जीत के लिए लगाया वो विजयी चौका और उसके बाद स्टोक्स की दहाड़, आज भी मेरे ज़ेहन में असंख्य क्रिकेट फैंस की तरह गूंजती है.
मुझे याद है 2022 में जब बेन स्टोक्स को इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी दी गई थी, उस दौरान इंग्लिश टीम लगातार हार रही थी. लेकिन फिर स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम ने मिलकर ‘बैज़बॉल’ की शुरुआत की और टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा बदल दी. उनका टीम के लिए सिर्फ एक मंत्र या फॉर्मूला था, कि चाहे जो हो जाए अब ड्रॉ नहीं, सिर्फ जीत के लिए खेलना है. इसी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण था जब भारत के खिलाफ इंग्लैंड ने 378 रन का लक्ष्य महज़ 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया था. स्टोक्स ने दुनिया को दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट 5 दिन लंबा होने के बावजूद रोमांच से भरपूर हो सकता है.
अगर स्टोक्स भारतीय होते…
भारत में हम खिलाड़ियों को आंकड़ों से ज्यादा जज़्बे से याद रखते हैं. इसलिए बेन स्टोक्स की विदाई भी कहीं न कहीं अपना सा खालीपन छोड़ जाती है. ज़रा सोचिए, अगर स्टोक्स भारत के लिए खेलते? शायद कपिल देव, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली जैसे महान मैच विनर्स की कतार में उनका नाम लिया जाता. आज जब दुनियाभर में कई खिलाड़ी फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट को प्राथमिकता दे रहे हैं, तो स्टोक्स ने टेस्ट क्रिकेट के लिए आईपीएल के करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट छोड़ा.
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वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया और हमेशा देश को पहले रखा. देश के लिए खेलने की खातिर वो ऐसी मिसाल बने जैसा भारत में भी गिने-चुने क्रिकेटर्स ही कर पाए. ऐसे खिलाड़ियों को सिर्फ सम्मान नहीं, श्रद्धा मिलती है. यकीनन अगर वो भारतीय क्रिकेटर होते तो वर्ल्ड क्रिकेट में उनका रूतबा और बड़ा हो जाता.
थका हुआ शरीर, क्रिकेट से फिर मोहब्बत!
बेन स्टोक्स के इंटरनेशनल करियर पर नज़र डालें तो उन्हें लगी लगातार चोटों का ज़िक्र करना लाज़िमी हो जाता है. घुटने की सर्जरी से लेकर हैमस्ट्रिंग की परेशानी और कभी कंधे की चोट. देखा जाए तो सिर्फ 35 की उम्र तक स्टोक्स का शरीर इंटरनेशनल क्रिकेट की कीमत चुका चुका था. उन्होंने स्वीकार किया कि लगातार दबाव का असर उनके परिवार और निजी जीवन पर भी पड़ रहा था. सस्पेंशन के दौरान डरहम के लिए खेलते हुए उन्हें क्रिकेट का वही पुराना आनंद फिर महसूस हुआ, जहां न कैमरों का शोर था, न करोड़ों उम्मीदों का बोझ. शायद तभी उन्होंने तय कर लिया कि अब नाम और शोहरत से ज्यादा खेल का सुकून चुनना है.
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Ben Stokes retires from international cricket with the most sixes ever hit in a test career – 138 pic.twitter.com/Q7ZYfJlmIf
अपने करियर में बेन स्टोक्स सिर्फ 7000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन और 250 विकेट छोड़कर नहीं जा रहे. वो हेडिंग्ले का चमत्कार, 2019 वर्ल्ड कप की अमर कहानी, 2022 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की मैच जिताऊ पारी और ‘बैज़बॉल’ जैसी सोच छोड़कर जा रहे हैं. कुछ लोग शायद करियर के आखिरी पड़ाव पर हुए नाइटक्लब विवाद और टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड की लगातार हार को बेन स्टोक्स के संन्यास की वजह के तौर पर देखेंगे.
लेकिन मैं बस यहीं कहूंगा कि बेन स्टोक्स का संन्यास किसी दुखद अध्याय का अंत नहीं. ये संन्यास एक ऐसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का क्लाइमैक्स है, जिसके खत्म होने पर दर्शक उदास नहीं, खड़े होकर तालियां बजाते हैं. क्रिकेट को ऐसे खिलाड़ी बार-बार नहीं मिलते. बेन स्टोक्स सिर्फ इंग्लैंड के महान ऑलराउंडर नहीं थे, बल्कि उस दौर के आखिरी रॉकस्टार थे, जिन्होंने हर बार मैदान पर उतरकर यह भरोसा जगाया कि जब तक वे क्रीज़ पर हैं, मैच और कहानी दोनों अभी बाकी हैं.