Rishabh Sharma
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खेल हो या आम ज़िंदगी जब-जब कुछ अच्छा और अप्रत्याशित घटित हुआ है हिंदुस्तान में लोगों को एक कहावत है हमेशा याद आती है. हिंदी की ये कहावत आपने भी सुनी या पढ़ी होगी कि, ‘सौ सुनार की तो एक लोहार की.’ जब दिलीप ट्रॉफी के अपने डेब्यू मैच में वैभव सूर्यवंशी जल्दी आउट हुए तो क्रिकेट पंडितों ने उनके रेड बॉल टेंपरामेंट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए.
लेकिन सेंट्रल ज़ोन के खिलाफ सेमीफाइनल में इस चैंपियन खिलाड़ी ने 81 गेंदों में 92 रन ठोककर हर आलोचना का करारा जवाब दिया. इसी के साथ उन्होंने दिलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. आज मेरा भी दिल तमाम सवाल उठाने वालों को यही बात बोलना चाहता है कि ‘सौ सुनार की तो एक लोहार की.’ वाकयी आज वैभव ने अपने सभी आलोचकों की बोलती हमेशा के लिए बंद कर दी है.
दरअसल वैभव सूर्यवंशी को पिछले दिनों सिलेक्टर्स ने आज़माइश का बड़ा मौका दिया था. वैभव का सिलेक्शन दिलीप ट्रॉफी के लिए ईस्ट ज़ोन की टीम में हुआ. 23 अगस्त के रोज़ नॉर्थ ईस्ट ज़ोन के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू भी हो गया. फिर ये खुशी कुछ ही देर में उस वक्त काफूर हो गई जब अपनी 6 गेंदों पर खेली 8 रनों की पारी के बाद वैभव तुरंत पैवेलियन लौट गए. उन्हीं की टीम से 2-2 बड़े शतक बने तो ईस्ट ज़ोन ने पारी और 210 रनों के अंतर के साथ सेमीफाइनल में बड़ी जीत के साथ एंट्री भी ले ली. नतीजा ये रहा कि वैभव के लिए माहौल तुरंत बदल गया.
कई क्रिकेट फैंस से लेकर क्रिकेट के कुछ पंडित वैभव की अति आक्रामक बैटिंग और जल्दबाज़ी में रन बनाने की आदत का ज़िक्र करते हुए उनके टैंपरामेंट पर सवाल उठाने लगे. किसी ने कहा कि वैभव सिर्फ टी20 फॉर्मेट का खिलाड़ी है, तो किसी ने उन्हें घरेलू क्रिकेट के प्रतिष्ठित रेड बॉल टूर्नामेंट दिलीप ट्रॉफी में खिलाने को भी गलत फैसला बताया. टीम की उपकप्तानी मिलने पर उठे सवालों की तो बात छोड़ ही दीजिए. रेड बॉल क्रिकेट की सिर्फ 1 पारी और जिसने मुंह उतनी बातें … वैभव सूर्यवंशी को लेकर ऐसी भी राय दी गई कि उन्हें अपनी विकेट की अहमियत का अहसास नहीं है या वो संयम से बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते.
Vaibhav Sooryavanshi & 90s Dismissals
— 𝑺𝒉𝒆𝒃𝒂𝒔 (@Shebas_10dulkar) August 31, 2026
A Never-Ending Story!
Today, he was dismissed for 92 in the Duleep Trophy Semifinal (He had a chance to become the youngest-ever centurion in Duleep Trophy history)#DuleepTrophy pic.twitter.com/s8dS2urXO2
बैंगलुरू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की पिच पर सेंट्रल और ईस्ट ज़ोन के बीच सेमीफाइनल मैच में बड़े-बड़े बल्लेबाज़ों को गेंद की लाइन और लेंथ समझने में पसीने छूट रहे थे. फिर भी वहां वैभव अलग ही लय में दिखे. 92 रन की उस पारी में 7 चौके और 7 छक्के लगाना कोई मज़ाक नहीं था. वैभव गेंद का इंतज़ार नहीं करते बल्कि आगे बढ़कर गेंद की हरकत को ही खत्म कर देते हैं.
शतक से महज़ 8 रन दूर होने के बावजूद उन्होंने अपना अंदाज़ नहीं बदला और बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में बाउंड्री पर कैच आउट हो गए. आज रेड बॉल क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाज़ी को देखते हुए अनायास ही मुल्तान के सुल्तान वीरेंद्र सहवाग की याद ताज़ा हो गई. हालांकि सहवाग दाएं हाथ के बल्लेबाज़ थे और वैभव बाएं हाथ से खेलते हैं. लेकिन फिर भी दोनों में सबसे बड़ी समानता है अपने खेल पर अटूट विश्वास. सहवाग की तरह वैभव को भी माइलस्टोन की परवाह नहीं. उन्हें बस अपने अंदाज़ में क्रिकेट का असली लुत्फ उठाना आता है.
A SUPERSTAR IN MAKING – 15 year old Vaibhav Sooryavanshi 🫡 pic.twitter.com/KCKtoRWlZv
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 31, 2026
किसी भी 15 साल के लड़के के लिए अपने से अनुभवी खिलाड़ियों का नेतृत्व करना बड़ी चुनौती हो सकती है. लेकिन वैभव के लिए ये भी खेल का एक हिस्सा दिखा. सेंट्रल ज़ोन के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में जब रेगुलर कप्तान ईशान किशन कलाई में चोट के कारण मैदान से बाहर गए तो अचानक टीम की पूरी ज़िम्मेदारी इस युवा उपकप्तान पर आ गई.
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कम अनुभव होने के बावजूद वैभव ने मैदान पर जो सूझबूझ दिखाई वो काबिले तारीफ थी. फील्डरों को सही जगह पर लगाना हो, गेंदबाज़ों का रोटेशन हो या फिर सटीक समय पर DRS लेने का फैसला हर मोर्चे पर वैभव अव्वल नज़र आए. ऐसा लग रहा था मानो वो सालों से कप्तानी कर रहे हों. क्रिकेट के जानकार भी उनकी कप्तानी को 100 में से 80 नंबर ज़रूर देंगे.
Another match, another record for Vaibhav Sooryavanshi🥳
— 𝐕𝐒𝐩𝐞𝐚𝐤𝐬🎧 (@VtheThinker) August 31, 2026
With every match he plays, he seems to be creating a new record. Now, he has become the youngest player to score a fifty in Duleep Trophy history👏🏻
New records, new milestones -the Vaibhav Sooryavanshi show just keeps… pic.twitter.com/dmsMlyAHRG
अगर आपको लगता है कि वैभव सिर्फ एक विस्फोटक बल्लेबाज़ हैं तो उनके पिछले मैच के आंकड़े जरूर देखने चाहिए. नॉर्थ ईस्ट ज़ोन के खिलाफ दिलीप ट्रॉफी के पिछले मैच में वैभव को गेंदबाज़ी करने का भी मौका मिला. खुद वैभव के मुताबिक कप्तान ईशान किशन ने उन्हें गेंदबाज़ी का मौका देते हुए सिर्फ एक जुआ खेला था. लेकिन खुद ईशान को भी अंदाज़ा नहीं था कि ये दांव इतना सटीक बैठेगा. वैभव ने अपने बाएं हाथ की स्पिन का ऐसा जादू चलाया कि महज़ तीन ओवर में 11 रन देकर दो अहम विकेट झटक लिए. मैच के बाद उन्होंने वैभव ने मज़ाकिया लहज़े में बताया था कि ईशान भैया को लग रहा था कि ‘मुझे गेंद देना रिस्क है लेकिन उन्हें पता नहीं था कि मैं एक विकेट टेकर गेंदबाज़ हूं.’
– T20 ✅
— Sam (@cricsam02) August 31, 2026
– ODI ✅
– Test ✅
LADIES & GENTLEMEN MEET NEW ALL FORMAT SUPERSTAR OF TEAM INDIA – VAIBHAV SURYAVANSHI 🇮🇳 pic.twitter.com/2WcR6cowrn
इतनी छोटी उम्र में कामयाबी अक्सर खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ा देती है. यही वजह है कि राहुल द्रविड़ और रविचंद्रन अश्विन जैसे महान क्रिकेटरों ने वैभव को लेकर एक बेहद ज़रूरी सलाह दी है. उनका मानना है कि हमें इस युवा खिलाड़ी को लेकर कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए. प्रकृति का नियम है जब सूरज उगता है तो उसे अपनी पूरी चमक बिखेरने और उजाला करने में एक तय समय लगता है.
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आप सूरज को जल्दी निकलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. ठीक वैसे ही वैभव भी अभी अनुभव की आग में तप रहे हैं. उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट की चुनौतियों का सामना करने का पर्याप्त वक्त दिया जाना चाहिए. जब वो इस भट्टी से तपकर निकलेंगे तो यकीनन कुंदन बनेंगे. समय आने पर वो टीम इंडिया के लिए हर फॉर्मेट में खेलते दिखेंगे. मैं भी यही कहता हूं कि अभी जरूरत है तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ने की.
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वैभव के अब तक के सफर पर नज़र डालें तो साल 2026 उनके लिए किसी खूबसूरत ख्वाब के सच होने जैसा रहा है. इस एक साल में उन्होंने वो सब हासिल कर लिया है जिसके लिए खिलाड़ी पूरी ज़िंदगी संघर्ष करते हैं. साल की शुरुआत में अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने भारत को चैंपियन बनाया. इसके बाद आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली. उन्होंने एक सीज़न में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ा. इस बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम उन्हें नेशनल टीम में जगह के रूप में मिला. ज़िम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने प्लेयर ऑफ द मैच और सीरीज़ बनकर अपनी बादशाहत साबित की. अब घरेलू सही लेकिन रेड बॉल क्रिकेट में भी उनका ये जलवा लगातार जारी है.
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तमाम उपलब्धियों और हालिया प्रदर्शन को देखकर यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के अगले सबसे बड़े सुपरस्टार हैं. भले ही अभी उन्हें सीनियर टीम के साथ सिर्फ टी20 फॉर्मेट खेलने का मौका मिला है. लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि दूसरे फॉर्मेट्स यानी वन-डे और टेस्ट क्रिकेट के दरवाज़े भी उनके लिए जल्द ही खुलने वाले हैं. दिलीप ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगिता में उनके कमाल ने चयनकर्ताओं को कड़ा संदेश दे दिया है. खेल के प्रति उनका नज़रिया हो या दबाव सहने की क्षमता और हर परिस्थिति में खुद को ढालने का हुनर… ये सभी बातें वैभव सूर्यवंशी को संपूर्ण क्रिकेटर बनाती हैं.
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