क्या बैरिकेड लगाने से घट सकते हैं सड़क हादसे? IIT की स्टडी में सामने आया रोड सेफ्टी से जुड़ा सच

How Chicane Style Barricades Works: चिकेन स्टाइल के बैरिकेड्स तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने सोचा है कि इससे रोड पर ट्रैवल करने वालों के लिए क्या फायदा हो सकता है. आईआईटी खड़गपुर ने इसको लेकर एक अहम रिसर्च की है, जो रोड सेफ्टी को लेकर एक बड़े सच को उजाकर करता है.

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मुख्य बिंदु

  • आईआईटी खड़गपुर ने हाईवे दुर्घटनाओं को कम करने में चिकेन स्टाइल के बैरिकेड्स को असदार पाया.
  • स्टडी में पश्चिम बंगाल में NH-16 के 51 किलोमीटर के हिस्से को शामिल किया गया.
  • कार की स्पीड 39-45% कम हो गई, जबकि भारी वाहनों की गति 29-33% धीमी हो गई.
  • स्पीड मैनेजमेंड उपायों के बाद घातक दुर्घटनाएँ और दुर्घटना की गंभीरता काफी कम हो गई.
  • ये 2030 तक सड़क मृत्यु दर में 50% की कमी लाने के भारत के लक्ष्य का समर्थन करते हैं.

Chicane-Style Barricades Can Improve Highway Safety: आईआईटी खड़गपुर के एक रीसेंट स्टडी में पाया गया है कि भारतीय हाइवे पर सड़क हादसे और मौतों को कम करने के लिए चिकेन स्टाइल की बैरिकेडिंग एक असरदार और किफायती तरीका है. जैसे-जैसे भारत के हाइवे नेटवर्क का विस्तार जारी है, रिसर्चर्स का मानना ​​है कि ऐसी इंजीनियरिंग बेस्ड स्पीड मैनेजमेंट टेक्निक रोड सेफ्टू में सुधार करने में अहम रोल अदा कर सकती हैं.

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कैसे की गई रिसर्च?

ये रिसर्च पश्चिम बंगाल में बालीहाटी और कोलाघाट के बीच नेशनल हाइवे 16 के 51 किलोमीटर के हिस्से पर किया गया था. इसमें व्हीकल की स्पीड और हादसे की गंभीरता पर ट्रैफिक एनफोर्समेंट के उपायों के साथ-साथ चिकेन-स्टाइल बैरिकेड्स के असर का इवेल्युएशन किया गया.

स्टडी के नतीजे

चिकेन स्टाइल बैरिकेड्स का इस्तेमाल करके बनाए गए कोमल, वैकल्पिक मोड़ों की एक सीरीज है जो ड्राइवरों को सिर्फ स्पीड ब्रेकर या पुलिस एनफोर्समेंट पर डिपेंड रहने के बजाय स्वाभाविक रूप से धीमी गति से चलने के लिए मजबूर करती है. स्टडी के मुताबिक, इन उपायों से कारों की एवरेज ऑपरेटिंग स्पीड 39-45 फीसदी, भारी वाहनों की 29-33 फीसदी और दोपहिया वाहनों की 18-28 फीसदी कम हो गई.

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हादसों में कमी

रिसर्चर्स ने उन लोकेशंस पर घातक दुर्घटनाओं, सड़क पर मौतों और ओवरऑल एक्सिडेंट की गंभीरता में काफी गिरावट देखी है जहां ये ट्रैफिक को-शांत करने वाले उपाय स्थापित किए गए थे. फाइंडिंग्स से पता चलता है कि सड़क डिजाइन के जरिए व्हीकल की स्पीड को कंट्रोल करने से गंभीर हादसों का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है.

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हादसे रोकना मुमकिन

स्टडी में शामिल रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स ने कहा कि साइंटिफिक इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस, इफेक्टिव स्पीड मैनेजमेंट और स्ट्रिक्ट एनफोर्समेंट के कॉम्बिनेशन के जरिए हाइवे के हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्पीड लिमिट सड़क के डिजाइन और सभी यूजर्स, खासकर पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों की सुरक्षा जरूरतों पर आधारित होनी चाहिए.

निष्कर्ष

आईआईटी खड़गपुर का अध्ययन इस बात पर जोर डालता है कि सिंपर इंजीनियरिंग सॉल्यूशन हाइवे को काफी सेफ बना सकते हैं. चिकेन-स्टाइल के बैरिकेड्स ड्राइवरों को स्वाभाविक रूप से गति कम करने के लिए एनकरेज करते हैं, जिससे महंगे बुनियादी ढांचे की जरूरत के बिना घातक हादसे की संभावना कम हो जाती है. जैसे-जैसे भारत अपने रोड नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, वैज्ञानिक और लागत असरदार यातायात प्रबंधन उपायों को अपनाना लॉन्ग टर्म रोड सेफ्टी के मकसद को हासिल करने में अहम रोल अदा कर सकता है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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