Exoplanet Discovery: ब्रह्मांड में नए जीवन की खोज! सौर मंडल के बाहर पहली बार पृथ्वी जैसे ग्रह पर मिला वायुमंडल; जानिए क्या ‘LHS 1140 b’ पर रह सकता है इंसान?
Exoplanet Discovery: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 48 प्रकाश वर्ष दूर 'LHS 1140 b' ग्रह पर वायुमंडल खोजा है. जानिए क्या 'गोल्डिलॉक्स ज़ोन' में मौजूद इस ग्रह पर जीवन संभव है.
सौर मंडल के बाहर पहली बार पृथ्वी जैसे ग्रह पर मिला वायुमंडल
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Space Science News: हमारे सौर मंडल से बाहर जीवन की खोज में लगे वैज्ञानिकों को एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी सफलता मिली है. शोधकर्ताओं ने पहली बार किसी दूसरे तारे के रहने योग्य क्षेत्र ('गोल्डिलॉक्स ज़ोन') में चक्कर लगा रहे पृथ्वी जैसे एक चट्टानी ग्रह पर वायुमंडल की मौजूदगी के पुख्ता सबूत हासिल किए हैं. इस ऐतिहासिक खोज को ब्रह्मांड में जीवन की संभावनाओं को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.
दरअसल, वैज्ञानिकों ने जिस ग्रह पर वायुमंडल की खोज की है, उसका नाम 'एलएचएस 1140 बी' (LHS 1140 b) है, जो पृथ्वी से करीब 48 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. यह ग्रह अपने सौर मंडल में एक छोटे और ठंडे लाल बौने तारे की परिक्रमा करता है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मुख्य शोधकर्ता डॉ. कॉलिन चेरुबिम ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब किसी चट्टानी ग्रह के चारों ओर वायुमंडल की पुष्टि हुई है. अब तक 6,000 से अधिक बाहरी ग्रहों की खोज की जा चुकी है, लेकिन यह खोज अपनी तरह का पहला मामला है.
क्या होता है 'गोल्डिलॉक्स ज़ोन' और क्यों है यह खास?
विज्ञान में उस क्षेत्र को 'गोल्डिलॉक्स ज़ोन' कहा जाता है जो अपने तारे से बिल्कुल सही दूरी पर होता है. यानी वहां का तापमान न तो बहुत ज्यादा गर्म होता है और न ही अत्यधिक ठंडा, जिससे सतह पर पानी के तरल रूप में रहने की संभावना बनती है. यद्यपि वैज्ञानिकों ने अपने तारों के इस ज़ोन में सैकड़ों ग्रहों की पहचान की है, लेकिन उनमें से बेहद कम पृथ्वी की तरह चट्टानी हैं. एलएचएस 1140 बी इस मामले में बेहद खास है, क्योंकि यह न सिर्फ चट्टानी है बल्कि इसके पास अपना एक वायुमंडल भी मौजूद है.
हालिया अध्ययन के अनुसार, एलएचएस 1140 बी के ऊपरी वायुमंडल में फिलहाल हीलियम गैस की मौजूदगी का पता चला है. हालांकि अकेले हीलियम जीवन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि वायुमंडल की निचली परतों में अन्य जीवनदायी गैसें भी मौजूद हो सकती हैं. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. डेविड शार्बोनो का कहना है कि यह अध्ययन इस बड़े सवाल का जवाब खोजने के करीब ले जाता है कि क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड में अकेले हैं या कहीं और भी जीवन की सांसें मौजूद हैं.
के2-18बी और ट्रैपिस्ट-1 पर भी टिकी हैं वैज्ञानिकों की निगाहें
जीवन की इस तलाश में वैज्ञानिक सिर्फ एलएचएस 1140 बी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि 'के2-18बी' और 'ट्रैपिस्ट-1' प्रणाली के ग्रहों पर भी लगातार शोध जारी है. हालांकि, नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा किए गए अध्ययनों में ट्रैपिस्ट-1डी पर पृथ्वी जैसे वायुमंडल की संभावना खारिज हो चुकी है और के2-18बी के आंकड़ों पर भी मंथन चल रहा है. इसके बावजूद, एलएचएस 1140 बी पर मिला वायुमंडल दुनिया भर के खगोलविदों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है. तारे के रहने योग्य 'गोल्डिलॉक्स ज़ोन' में होने के कारण यहां पानी और जीवन की संभावना तो है, लेकिन इंसान के रहने के लिए अभी और शोध की जरूरत है.
Space Science News: हमारे सौर मंडल से बाहर जीवन की खोज में लगे वैज्ञानिकों को एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी सफलता मिली है. शोधकर्ताओं ने पहली बार किसी दूसरे तारे के रहने योग्य क्षेत्र (‘गोल्डिलॉक्स ज़ोन’) में चक्कर लगा रहे पृथ्वी जैसे एक चट्टानी ग्रह पर वायुमंडल की मौजूदगी के पुख्ता सबूत हासिल किए हैं. इस ऐतिहासिक खोज को ब्रह्मांड में जीवन की संभावनाओं को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.
दरअसल, वैज्ञानिकों ने जिस ग्रह पर वायुमंडल की खोज की है, उसका नाम ‘एलएचएस 1140 बी’ (LHS 1140 b) है, जो पृथ्वी से करीब 48 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. यह ग्रह अपने सौर मंडल में एक छोटे और ठंडे लाल बौने तारे की परिक्रमा करता है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मुख्य शोधकर्ता डॉ. कॉलिन चेरुबिम ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब किसी चट्टानी ग्रह के चारों ओर वायुमंडल की पुष्टि हुई है. अब तक 6,000 से अधिक बाहरी ग्रहों की खोज की जा चुकी है, लेकिन यह खोज अपनी तरह का पहला मामला है.
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क्या होता है ‘गोल्डिलॉक्स ज़ोन’ और क्यों है यह खास?
विज्ञान में उस क्षेत्र को ‘गोल्डिलॉक्स ज़ोन’ कहा जाता है जो अपने तारे से बिल्कुल सही दूरी पर होता है. यानी वहां का तापमान न तो बहुत ज्यादा गर्म होता है और न ही अत्यधिक ठंडा, जिससे सतह पर पानी के तरल रूप में रहने की संभावना बनती है. यद्यपि वैज्ञानिकों ने अपने तारों के इस ज़ोन में सैकड़ों ग्रहों की पहचान की है, लेकिन उनमें से बेहद कम पृथ्वी की तरह चट्टानी हैं. एलएचएस 1140 बी इस मामले में बेहद खास है, क्योंकि यह न सिर्फ चट्टानी है बल्कि इसके पास अपना एक वायुमंडल भी मौजूद है.
हालिया अध्ययन के अनुसार, एलएचएस 1140 बी के ऊपरी वायुमंडल में फिलहाल हीलियम गैस की मौजूदगी का पता चला है. हालांकि अकेले हीलियम जीवन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि वायुमंडल की निचली परतों में अन्य जीवनदायी गैसें भी मौजूद हो सकती हैं. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. डेविड शार्बोनो का कहना है कि यह अध्ययन इस बड़े सवाल का जवाब खोजने के करीब ले जाता है कि क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड में अकेले हैं या कहीं और भी जीवन की सांसें मौजूद हैं.
के2-18बी और ट्रैपिस्ट-1 पर भी टिकी हैं वैज्ञानिकों की निगाहें
जीवन की इस तलाश में वैज्ञानिक सिर्फ एलएचएस 1140 बी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ‘के2-18बी’ और ‘ट्रैपिस्ट-1’ प्रणाली के ग्रहों पर भी लगातार शोध जारी है. हालांकि, नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा किए गए अध्ययनों में ट्रैपिस्ट-1डी पर पृथ्वी जैसे वायुमंडल की संभावना खारिज हो चुकी है और के2-18बी के आंकड़ों पर भी मंथन चल रहा है. इसके बावजूद, एलएचएस 1140 बी पर मिला वायुमंडल दुनिया भर के खगोलविदों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है. तारे के रहने योग्य ‘गोल्डिलॉक्स ज़ोन’ में होने के कारण यहां पानी और जीवन की संभावना तो है, लेकिन इंसान के रहने के लिए अभी और शोध की जरूरत है.
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