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पृथ्वी के कोर से टकराकर लौटी भूकंप की तरंगें, महाप्रलय से खिसकी जापान की जमीन! वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा

वैज्ञानिकों ने 2011 में जापान में आए विनाशकारी तोहोकू भूकंप से जुड़ी एक चौंकाने वाली खोज की है. रिसर्च में पता चला है कि भूकंप से निकली शक्तिशाली भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के कोर तक पहुंचीं और वापस लौटने के बाद जापान में एक और हलचल का कारण बनीं. इस घटना के चलते जापान की जमीन कुछ मिलीमीटर तक पूर्व दिशा में खिसक गई थी.

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साल 2011 में जापान में आया 9.0 तीव्रता का तोहोकू-ओकी भूकंप इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक था. अब इस भूकंप से जुड़ी एक नई और हैरान करने वाली खोज सामने आई है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि भूकंप से पैदा हुई शक्तिशाली भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के भीतर हजारों किलोमीटर की यात्रा करके कोर तक पहुंचीं और वहां से वापस लौटने के बाद जापान में एक दूसरी भूगर्भीय हलचल को ट्रिगर कर दिया. रिसर्चर्स के मुताबिक, ये घटना मुख्य भूकंप के करीब 16 मिनट बाद हुई थी. भूकंपीय तरंगें लगभग 5,800 किलोमीटर की दूरी तय कर पृथ्वी के तरल बाहरी कोर से टकराईं और फिर वापस सतह की ओर लौटीं. वैज्ञानिकों का मानना है कि लौटने वाली इन तरंगों ने जापान के आसपास मौजूद टेक्टोनिक प्लेट सीमाओं पर दबाव डाला, जिससे जमीन में एक खिसकाव दर्ज किया गया.

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स्टडी में और क्या पता चला?

स्टडी में बताया गया कि जापान के एड्वांस्ड जीपीएस नेटवर्क ने उस समय एक रहस्यमयी संकेत दर्ज किया था. देशभर के कई निगरानी केंद्रों ने लगभग एक ही समय पर जमीन के पूर्व दिशा में खिसकने का रिकॉर्ड दर्ज किया, लेकिन उस समय कोई बड़ा आफ्टरशॉक नहीं आया था. यही वजह थी कि ये बदलाव सालों तक वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना रहा. नई रिसर्च से पता चला कि ये खिसकाव लगभग 6 मिलीमीटर तक था. हालांकि ये दूरी बेहद कम लग सकती है, लेकिन पूरे देश के बड़े हिस्से में एक साथ ऐसा बदलाव होना वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है.

क्यों खास है ये बदलाव?

विशेषज्ञों का कहना है कि ये पहली बार है जब पृथ्वी के कोर से टकराकर वापस आने वाली भूकंपीय तरंगों के कारण किसी बड़े भूगर्भीय बदलाव के साफ सबूत मिले हैं. इससे ये समझने में मदद मिलेगी कि बड़े भूकंप पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सों और सतह पर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों को किस तरह प्रभावित करते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये खोज पृथ्वी की आंतरिक संरचना और भूकंप विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे भविष्य में बड़े भूकंपों के प्रभावों को बेहतर तरीके से समझने और उनके बाद होने वाली छिपी भूगर्भीय गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है.

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First published on: Jun 19, 2026 05:31 PM

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About the Author

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जो पिछले 9 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। वर्तमान में वर्षा News24 में सीनियर सब एडिटर की भूमिका निभा रही हैं। यहां ये नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि खबरें करती हैं। इससे पहले वर्षा आज तक, ज़ी न्यूज, रिपब्लिक, इंडिया टीवी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम कर चुकी हैं। वर्षा ने बतौर रिपोर्टर और एंकर भी काम किया है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ वर्षा को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग खबरों का भी बखूबी अनुभव है। खबरों के अलावा वर्षा कहानियां और कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं।

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