Vikat Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी आज, जानें विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर व्रत के पारण का समय

Vikat Sankashti Chaturthi Vrat 2026: आज 5 अप्रैल 2026 को देशभर में विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है, जो कि विघ्नहर्ता गणेश को समर्पित है. यहां पर आप गणपति बप्पा की पूजा के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत के पारण का समय जान सकते हैं.

Vikat Sankashti Chaturthi 2026

Credit- Social Media

Vikat Sankashti Chaturthi Vrat 2026 Today Shubh Muhurat & Puja Vidhi: भगवान गणेश के भक्तों के लिए विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण होता है, जो कि हर साल द्रिक पंचांग के अनुसार वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस दिन विशेषतौर पर भगवान गणेश के विकेट स्वरूप की पूजा की जाती है, जिनकी कृपा से हर संकट दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है.

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साल 2026 में आज 5 अप्रैल, वार रविवार को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है, जिसकी पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर पारण तक का समय आप यहां पर जान पाएंगे.

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विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • सूर्योदय- सुबह 06:07 मिनट पर
  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:35 से 05:21
  • अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:59 से दोपहर 12:49
  • अमृत काल- दोपहर में 02:24 से 04:10
  • गोधूलि मुहूर्त- शाम में 06:40 से 07:03
  • चन्द्रोदय- रात 09:58 मिनट पर

विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कार्य कर लें.
  • शुद्ध लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े धारण करें.
  • घर के मंदिर में भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
  • देसी घी का दीपक जलाने के बाद भगवान गणेश को चंदन, अक्षत, वस्त्र, दुर्वा घास, फूल, माला, गंगाजल, फल और मिठाई अर्पित करें.
  • मंत्र जाप करने के बाद व्रत की कथा सुनें या पढ़ें.
  • अंत में आरती जरूर करें.
  • शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने से पहले दान अवश्य करें.

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विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत किस समय खोलें?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत चन्द्रोदय के बाद गणेश जी की पूजा और चंद्र देव को अर्घ्य देने के पश्चात खोलना शुभ होता है. आज रात 9 बजकर 58 मिनट के आसपास चन्द्रोदय होगा, जिसके बाद आप व्रत का पारण कर सकते हैं.

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बता दें कि विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत फलाहार और निर्जला दोनों तरह से रखा जा सकता है. निर्जला व्रत में कुछ भी खाने और पीने की मनाही होती है, जबकि फलाहार में फल, दूध, दही, साबूदाने की खिचड़ी और पूरी, कुट्टू की पूरी, सिंघाड़े की खिचड़ी या पूरी, मखाने की खीर और सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है. हालांकि, फलाहार के व्रत में केवल सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करना शुभ होता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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