Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. शिव भक्त महादेव की कृपा क लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा करते हैं. कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान एक पड़ाव यम द्वार आता है. इस यात्रा में यम द्वार को बेहद खास माना जाता है. इस यात्रा के दौरान यम द्वार को बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. कैलाश पर्वत यात्रा के दौरान यम द्वार कहां पड़ता है और यह इतना खास क्यों है, आइये जानते हैं.
कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra)
कैलाश मानसरोवर यात्रा को आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. साल 2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन जून से अगस्त के बीच किया जा रहा है. इस समय भक्त दर्शन के लिए जा रहे हैं. कैलाश यात्रा के दौरान यम द्वार नाम का एक स्थान आता है. यम द्वार को देवता यमराज का द्वार मानते हैं. ऐसी मान्यता है कि, यहां पर मृत्यु के देवता यमराज शिव जी के निवास स्थान की रक्षा करते हैं.
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कहां स्थित है यम द्वार?
यम द्वार कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कैलाश पर्वत की परिक्रमा का प्रारंभिक बिंदु है. यहां से यात्रा की शुरुआत मानी जाती है. यम द्वार से ही 50 किलोमीटर से अधिक लंबी कैलाश परिक्रमा की जाती है. यम द्वार तिब्बत में कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है. यह दारचेन शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यम द्वार मृत्यु के देवता से संबंधित है और इसके साथ ही कैलाश यात्रा की शुरुआत यहां से होती है. ऐसे में इसका खास धार्मिक महत्व है.
यम द्वार का धार्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति को कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान यम द्वार से गुजरने पर पुनर्जन्म और सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिल जाती है. श्रद्धालु यहां पहुंचने के बाद श्रद्धा और विनम्रता के साथ शिव जी का स्मरण कर यात्रा आरंभ करते हैं.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. शिव भक्त महादेव की कृपा क लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा करते हैं. कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान एक पड़ाव यम द्वार आता है. इस यात्रा में यम द्वार को बेहद खास माना जाता है. इस यात्रा के दौरान यम द्वार को बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. कैलाश पर्वत यात्रा के दौरान यम द्वार कहां पड़ता है और यह इतना खास क्यों है, आइये जानते हैं.
कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra)
कैलाश मानसरोवर यात्रा को आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. साल 2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन जून से अगस्त के बीच किया जा रहा है. इस समय भक्त दर्शन के लिए जा रहे हैं. कैलाश यात्रा के दौरान यम द्वार नाम का एक स्थान आता है. यम द्वार को देवता यमराज का द्वार मानते हैं. ऐसी मान्यता है कि, यहां पर मृत्यु के देवता यमराज शिव जी के निवास स्थान की रक्षा करते हैं.
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कहां स्थित है यम द्वार?
यम द्वार कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कैलाश पर्वत की परिक्रमा का प्रारंभिक बिंदु है. यहां से यात्रा की शुरुआत मानी जाती है. यम द्वार से ही 50 किलोमीटर से अधिक लंबी कैलाश परिक्रमा की जाती है. यम द्वार तिब्बत में कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है. यह दारचेन शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यम द्वार मृत्यु के देवता से संबंधित है और इसके साथ ही कैलाश यात्रा की शुरुआत यहां से होती है. ऐसे में इसका खास धार्मिक महत्व है.
यम द्वार का धार्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति को कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान यम द्वार से गुजरने पर पुनर्जन्म और सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिल जाती है. श्रद्धालु यहां पहुंचने के बाद श्रद्धा और विनम्रता के साथ शिव जी का स्मरण कर यात्रा आरंभ करते हैं.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.