Shani Jayanti 2026: शनिदेव को कर्मफल दाता और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है. शनिदेव की कृपा होने से व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है और सफलता हासिल करता है. अगर शनिदेव की बुरी दृष्टि हो, तो व्यक्ति संघर्ष, आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याएं और कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंस जाता है. अब शनि जंयती आ रही है आपको शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव के प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने चाहिए.
कब है शनि जयंती? (Shani Jayanti Kab Hai)
शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाती है. ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का आरंभ 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर हो रहा है. इसका समापन अगले दिन 17 मई की रात को 1 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, 16 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी. शनिदेव की कृपा के लिए आप शनिदेव की पूजा करें. आप शनिदेव की विशेष कृपा के लिए इन शनि मंदिरों में दर्शन के लिए जा सकते हैं.
शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर जिले में स्थित शनि शिंगणापुर बेहद प्रसिद्ध है. यह मंदिर स्वयंभू शनि देव मंदिर के लिए जाना जाता है. इस मंदिर में खुले आकाश के नीचे शनिदेव की एक काले पत्थर के रूप में पूजा की जाती है.
शनि मंदिर, इंदौर
मध्य प्रदेश इंदौर के जूनी इलाके में शनिदेव का प्रसिद्ध मंदिर है. ऐसी मान्यता है कि, इस मंदिर में शनिदेव खुस पधारे थे. शनि मंदिर में स्थापित शनिदेव की प्रतिमा एक टीले से निकली थी. यह स्वयंभू प्रतिमा है.
श्री शनि मंदिर कोकिलावन, मथुरा
श्री शनि मंदिर कोकिलावन मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित है. ऐसी मान्यता है इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव को कोयल रूप में दर्शन दिए थे.
शनिचरा मंदिर, मुरैना
मध्य प्रदेश में ग्वालियर और मुरैना की सीमा पर शनिचरा मंदिर है. यह शनिचरा मंदिर स्थापित शनिदेव की प्रतिमा आकाश से टूटकर गिरे हुए उल्कापिंड से निर्मित मानी जाती है.
शनि धाम, प्रतापगढ़
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में शनि धाम नाम से प्रसिद्ध मंदिर है. इस मंदिर में शारीरिक रोग को दूर करने और कार्यक्षेत्र में सफलता के लिए अर्जी लगाई जाती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.