Ratna Shastra: रत्न शास्त्र में रत्नों को धारण करने और इनके फायदों के बारे में बताया गया है. किसी ज्योतिषीय विशेषज्ञ को कुंडली दिखाने के बाद ही रत्न धारण करना शुभ फल देता है. कई लोग बिना कुंडली दिखाए रत्न धारण कर लेते हैं. आपको ऐसे रत्न के बारे में बताने वाले हैं इन्हें भूलकर भी कुंडली दिखाए बिना धारण नहीं करना चाहिए. बिना कुंडली दिखाए इन तीन रत्नों को धारण करना आपके लिए भारी पड़ सकता है. इन्हें धारण करने से फायदे की बजाय नुकसान झेलना पड़ सकता है. आइये इन तीन रत्नों के बारे में जानते हैं.
नीलम रत्न
कुंडली में शनि के मजबूत स्थिति में होने पर ही नीलम रत्न शुभ फल देता है. अगर कुंडली में शनि ग्रह कमजोर स्थिति में है, तो इसके कारण जीवन में उथल-पुथल हो सकती है. शनि के कमजोर स्थिति में होने पर नीलम रत्न धारण करने से आर्थिक संकट, स्वास्थ्य समस्या, करियर में बाधा और तनाव का सामना करना पड़ सकता है.
माणिक्य रत्न
कुंडली में सूर्य के शुभ स्थिति में होने पर माणिक्य रत्न शुभ फल देता है. हालांकि, अगर कुंडली में सूर्य ग्रह अशुभ स्थिति में है, तो इसके कारण बीमारी और काम में बाधा का सामना करना पड़ सकता है. किसी विशेषज्ञ को कुंडली दिखाने के बाद ही रत्न धारण करें.
मोती रत्न
मोती रत्न को कुंडली में चंद्रमा की मजबूत स्थिति होने पर धारण करना चाहिए. कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में होता है, तो यब शुभ फल नहीं देता है. चंद्रमा के कमजोर होने पर इसे धारण करने से नींद की समस्या, तनाव और जीवन में अशांति जैसी समस्या हो सकती है.
रत्न धारण करने को लेकर जरूरी सावधानियां
लोग अक्सर किस राशि के लिए कौन-सा रत्न शुभ होता है और रत्न के लाभ देखकर इसे धारण कर लेते हैं. हालाकिं, रत्न के लाभ के लिए कुंडली विशेषज्ञ को कुंडली जरूर दिखा लेनी चाहिए. कुंडली दिखाने के बाद ही रत्न धारण करने चाहिए. आप रत्न को किसी योग्य ज्योतिषी को कुंडली दिखाने के बाद शुद्ध करके धारण करें. रत्न धारण करने के लिए रत्न से संबंधित पूरी विधि का पालन करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और रत्न शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.