---विज्ञापन---

Religion

Shani Dev Janam Katha: कैसे हुआ था शनिदेव का जन्म? जानिए इनके माता-पिता और भाई-बहन का नाम, पढ़ें शनि जन्म कथा

Shani Dev Janam Katha: शनि जयंती का पर्व शनिदेव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था. शनिदेव का जन्म कैसे हुआ था इसको लेकर लोगों के मन में सवाल आता है. चलिए शनि देव की जन्म कथा के बारे मेें जानते है.

Author
Edited By : Aman Maheshwari Updated: May 12, 2026 11:40
Shani Dev Janam Katha
Photo Credit- News24GFX

Shani Jayanti 2026: शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाती है. इस साल ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई 2026, दिन शनिवार को है. 16 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी. यह दिन शनिदेव के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि, शनि जयंती के दिन शनिदेव का जन्म हुआ था. हालांकि, दक्षिण भारतीय अमावस्यान्त कैलेण्डर के अनुसार, शनि जयंती वैशाख माह की अमावस्या को मनाई जाती है. कई ग्रंथों में शनिदेव का जन्मदिवस भाद्रपद अमावस्या को माना जाता है.

शनिदेव को कर्मफलदाता और दंडाधिकारी माना जाता है. शनिदेव व्यक्ति को कर्मों के अनुसार फल देते हैं. शनिदेव राजा को रंक और रंक को राजा बना देते हैं. शनिदेव की कृपा से व्यक्ति के जीवन से कष्ट, बाधाए और ग्रह दोष खत्म होते हैं. शनिदेव की कृपा के लिए आपको शनि जयंती पर उनकी जन्म कथा को पढ़ना चाहिए. चलिए शनिदेव की जन्म कथा के बारे में जानते हैं.

---विज्ञापन---
Photo Credit- Social Media

ये भी पढ़ें – देवगुरु बृहस्पति की प्रिय होती हैं ये 3 राशियां, गुरु के आशीर्वाद से को मिलता है पैसा और मान-सम्मान

शनिदेव की जन्म कथा (Shani Dev Janam Katha)

शनिदेव को सूर्यदेव का पुत्र माना जाता है. सूर्यदेव का विवाह शिल्पी विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ था. उनके दो संतान यमराज और यमुना हुए. यम ने तपस्या कर धर्मराज का पद प्राप्त किया और यमुना धरती पर नदी के रूप में बहने लगी. संज्ञा सूर्यदेव की अग्नि के तेज प्रताप से परेशान रहती थीं. संज्ञा के लिए तेज प्रताप को सहना कठिन होता जा रहा था. एक बार वह अपनी परछाई छाया को सूर्यदेव की सेवा में छोड़कर तपस्या के लिए चली गईं. तब सूर्यदेव और छाया के मिलन से शनिदेव का जन्म हुआ. शनिदेव के भाई मृत्यु के देवता यमराज और बहन पवित्र नदी यमुना और भद्रा हैं. शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या को हुआ था इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाते हैं.

---विज्ञापन---

Photo Credit- Social Media

ये भी पढ़ें – Numerology: स्वभाव के गुस्सैल होते हैं इन तारीखों पर जन्मे लोग, लेकिन होती है एक खासियत, जानें

---विज्ञापन---

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे, तब छाया ने धूप-गर्मी में भूखा-प्यासा रहकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की. इसका असर गर्भ में पल रहे शनिदेव पर पड़ा. इसके कारण जन्म के समय शनिदेव का रंग काला था. शनिदेव के जन्म के बाद सूर्यदेव ने शनि के अपना पुत्र होने पर संदेश किया और छाया को अपमानिक किया. इसके बाद शनिदेव क्रोधित हो गए. शनिदेव में मां के तप की शक्ति आ गई थी, तो उन्होंने सूर्यदेव को अपनी दृष्टि से काला कर दिया. सूर्यदेव इसके बाद शिव जी के पास गए और उन्होंने क्षमा मांगी फिर अपना रूप वापस मिला. इसी वजह से शनिदेव और सूर्यदेव के पिता-पुत्र का रिश्ता होने के बाद भी संबंध खराब माने जाते हैं.

ये भी पढ़ें – Lucky Zodiac Signs: 13 मई को बुध के चाल बदलने से इन राशियों को होगा लाभ, करियर-कारोबार में करेंगे तरक्की

---विज्ञापन---

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: May 12, 2026 11:33 AM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.