Ratha Saptami 2025: 4 या 5 फरवरी, कब है रथ सप्तमी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Ratha Saptami 2025: हर साल माघ माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन रथ सप्तमी मनाई जाती है। हालांकि इस बार सप्तमी तिथि को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। चलिए जानते हैं साल 2025 में 4 फरवरी या 5 फरवरी, किस दिन रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा।

Ratha Saptami 2025

रथ सप्तमी 2025

Ratha Saptami 2025: सनातन धर्म के लोगों के लिए रथ सप्तमी का खास महत्व है, जिस दिन ग्रहों के राजा सूर्य की पूजा की जाती है। सूर्य देव की उपासना करने से साधक का आत्मविश्वास बढ़ता है और सेहत अच्छी रहती है। साथ ही उन्हें भय, क्रोध, लालसा और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा साधक के सफल होने की संभावना भी बढ़ जाती है। चलिए जानते हैं इस वर्ष किस दिन रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। साथ ही आपको सूर्य देव की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि के बारे में पता चलेगा।

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रथ सप्तमी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में माघ महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य देव का अवतरण हुआ था। इसलिए हर साल सप्तमी तिथि पर रथ सप्तमी मनाई जाती है। रथ सप्तमी पर सूर्य देव की सच्चे मन से पूजा करने से आरोग्यता का वरदान मिलता है। इसके अलावा इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान और जरूरतमंद लोगों को दान देना भी शुभ माना जाता है। इससे साधक को पुण्य मिलता है और पाप खत्म हो जाते हैं।

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2025 में कब है रथ सप्तमी?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार माघ महीने में आने वाली शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 04 फरवरी 2025 को सुबह 4 बजकर 37 मिनट से हो रहा है, जिसका समापन अगले दिन 05 फरवरी 2025 को प्रात: काल 02 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर 04 फरवरी 2025 को रथ सप्तमी मनाई जाएगी। 04 फरवरी यानी रथ सप्तमी के दिन अमृत सिद्धि योग, शुक्ल योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शुभ योग का निर्माण हो रहा है।

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4 फरवरी 2025 के शुभ मुहूर्त

  • सूर्योदय- सुबह 7:09
  • स्नान-दान- प्रात: काल 05:23 से लेकर सुबह 07:08 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:18 से लेकर 01:02 मिनट तक
  • अमृत काल- दोपहर 03:02 से लेकर 04:33 मिनट तक
  • ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: काल 05:32 से लेकर 06:20 मिनट तक
  • राहुकाल- दोपहर में 3:26 से लेकर 4:49 मिनट तक

रथ सप्तमी की पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • स्नान आदि कार्य करने के बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस दौरान सूर्य मंत्रों का जाप करें।
  • सूर्य चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में सूर्य देव की आरती करके पूजा का समापन करें।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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