Kaalchakra: अज्ञात-अविवाहित समेत अकाल मृत्यु वाले पितरों का कब करें श्राद्ध? पंडित सुरेश पांडेय से जानें पितृपक्ष की 15 तिथियों का महत्व

Kaalchakra Today: साल 2025 में गणेश विसर्जन के अगले दिन यानी 7 सितंबर से पितृपक्ष का आरंभ हो रहा है, जिसका समापन करीब 15 दिन बाद 21 सितंबर को होगा। चलिए प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं साल 2025 में श्राद्ध की सही तिथियों और महत्व के बारे में।

Kaalchakra Today 6 September 2025

Credit- News24 Graphics

Kaalchakra Today 6 September 2025: सनातन धर्म के लोगों के लिए पितृपक्ष के प्रत्येक दिन का खास महत्व है। प्रत्येक तिथि पर किसी न किसी पितृ का श्राद्ध किया जाता है। यदि सही तिथि और शुभ मुहूर्त में श्राद्ध किया जाता है तो पितृ व पूर्वज जल्दी प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन लोगों के पितृ व पूर्वज उनसे खुश होते हैं, वो अपनी विशेष कृपा कुल के प्रत्येक सदस्य के ऊपर बनाए रखते हैं। ऐसे में साधक को धन की कमी, खराब सेहत और असफलता का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं, जिनके पितृ उनसे खुश नहीं होते हैं, उन्हें पितृ दोष लगता है और वो जीवनभर परेशान रहते हैं।

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हालांकि, पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध, पिंडदान और तपर्ण आदि कार्य करके पितृ दोष से बचा जा सकता है। साथ ही इन श्राद्ध कार्यों से पितृ व पूर्वज खुश होते हैं। आज के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको पितृपक्ष की सही तिथियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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2025 में कब से कब तक चलेगा पितृपक्ष?

द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है, जो आश्विन माह की अमावस्या तक चलते हैं। इस बार 7 सितंबर 2025 से पितृपक्ष का आरंभ हो रहा है, जिसका समापन 15 दिन बाद 21 सितंबर को होगा। हालांकि, इन 15 दिनों में पितरों की मृत्यु और रिश्ते के अनुसार श्राद्ध कार्य किए जाते हैं।

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पितृपक्ष की कुल 15 तिथियां

Pitru Paksha Thithi
  • पूर्णिमा श्राद्ध

7 सितंबर 2025 को पूर्णिमा श्राद्ध है, जिसे श्राद्ध पूर्णिमा या प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध के नाम से जाना जाता है। पूर्णिमा तिथि पर जिनकी मृत्यु होती है, उनका श्राद्ध पूर्णिमा तिथि की जगह अमावस्या तिथि पर करना चाहिए। इस दिन अन्न और भोजन का दान करना उत्तम माना जाता है। इसके अलावा देव और ऋषियों का जल व फल से तर्पण करना चाहिए।

  • प्रतिपदा श्राद्ध

प्रतिपदा तिथि को पड़वा श्राद्ध कहा जाता है। जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि में हुई थी, उनका इस तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए। इसके अलावा दिवंगत आत्माओं, नाना-नानी और उनके रिश्तेदारों के आत्माओं की शांति के लिए इस दिन तर्पण व अनुष्ठान किए जाते हैं। वहीं, अकाल और अज्ञात पितरों का श्राद्ध चतुर्थी पर किया जाता है, जबकि पंचमी तिथि पर अविवहित पितरों का श्राद्ध करना शुभ होता है।

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यदि आप अन्य तिथियों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो उसके लिए ऊपर दिए गए वीडियो को देख सकते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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