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Religion

Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि में गेहूं की हरी बालियां और चने की फलियां क्यों डालते हैं, जानें होली के रिवाज

Holika Dahan 2026: पंचांग के अनुसार, इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा की रात में मनाया जाएगा। इस दिन लोग अग्नि में गेहूं और चने की हरी बालियां अर्पित करते हैं। आइए जानते हैं, ऐसा करने के पीछे क्या कारण है?

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Written By: Shyamnandan Updated: Feb 24, 2026 19:07
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Holika Dahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा की रात में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह उत्सव 3 मार्च, मंगलवार को होगा। इस दिन लोग होलिका की अग्नि में गेहूं की हरी बालियां और चने की फलियां डालते हैं, जिसे होरहा कहते हैं। आपको बता दें कि यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि कृषि और आस्था से जुड़ी गहरी मान्यता है। आइए जानते हैं, होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है और होलिका की अग्नि में गेहूं और चने समेत अन्य अनाजों की हरी बालियां और फलियां क्यों डालते हैं?

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च 2026 को शाम 06:22 से रात 08:50 तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च शाम 05:55 से शुरू होकर 3 मार्च शाम 05:07 पर समाप्त होगी। उसी दिन दोपहर 03:20 से शाम 06:47 तक चंद्र ग्रहण रहेगा। इसलिए पूजा ग्रहण और सूतक काल समाप्त होने के बाद ही करना श्रेयस्कर माना गया है।

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नवान्न की परंपरा

होलिका दहन को कई स्थानों पर नवान्नेष्टि यज्ञ भी कहा जाता है। फाल्गुन में रबी की फसल पक कर तैयार होती है। किसान नई उपज का पहला भाग अग्नि को समर्पित करते हैं। इसे ईश्वर के प्रति धन्यवाद माना जाता है। मान्यता है कि इससे आने वाले वर्ष में अन्न की कमी नहीं होती।

आभार और समृद्धि का संदेश

खेती कठिन परिश्रम मांगती है। महीनों की मेहनत के बाद जब खेत सुनहरे होते हैं, तब किसान सबसे पहले भगवान को याद करता है। होलिका की अग्नि में गेहूं और चना अर्पित करना कृतज्ञता का प्रतीक है। यह भाव समृद्धि और सुख की कामना से जुड़ा है।

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होला और प्रसाद की मान्यता

अग्नि में भूनी हुई बालियों को कई जगह होला कहा जाता है। इसे परिवार के लोग प्रसाद की तरह बांट कर खाते हैं। लोक विश्वास है कि यह शरीर को ऊर्जा देता है। मौसम बदलने के समय यह हल्का और पचने में आसान आहार माना जाता है।

ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य

फाल्गुन के बाद गर्मी की शुरुआत होती है। सर्दी से गर्मी की ओर यह बदलाव शरीर पर असर डालता है। भुना हुआ चना और गेहूं पोषण से भरपूर होता है। इसमें फाइबर और ऊर्जा तत्व होते हैं। ग्रामीण समाज इसे प्राकृतिक टॉनिक की तरह देखता है।

सात बालियों का महत्व

कई क्षेत्रों में सात गेहूं की बालियां अग्नि में डालने की परंपरा है। अंक सात को शुभ माना गया है। इसे आरोग्य और उन्नति से जोड़ा जाता है। परिवार के सदस्य इन्हें घर लाकर सुरक्षित रखते हैं।

अन्नपूर्णा से जुड़ी आस्था

यह परंपरा अन्न की देवी अन्नपूर्णा को प्रसन्न करने से भी जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि इससे घर के भंडार भरे रहते हैं। अन्न का सम्मान भारतीय संस्कृति का मूल भाव है। इस प्रकार होलिका दहन में नई फसल अर्पित करने की यह परंपरा आस्था, कृषि और स्वास्थ्य का संगम प्रस्तुत करती है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 24, 2026 07:04 PM

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