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Kalashtami Puja: वैशाख भैरव अष्टमी पर बन रहा है दुर्लभ योग, करें ये उपाय, 10 गुना अधिक मिलेगा फल

Kalashtami Puja: 10 अप्रैल 2026 की भैरव अष्टमी पर दुर्लभ योग बन रहा है, जिसे साधना के लिए बेहद शुभ माना गया है. इस दिन के छोटे-छोटे उपाय भी कई गुना फल देते हैं? जानिए कैसे इस वैशाख कालाष्टमी के आसान उपाय जीवन की बाधाएं कम कर सकते हैं?

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Kalashtami Puja: साल 2026 में वैशाख माह की कालाष्टमी इस बार खास मानी जा रही है. शुक्रवार 10 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली भैरव अष्टमी पर दुर्लभ योग बन रहा है, जिसे साधना और पूजा के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए छोटे उपाय भी कई गुना फल देते हैं और जीवन की बाधाएं कम होती हैं. आइए जानते हैं, आसान लेकिन असरदार उपाय.

तिथि और पूजा का समय

वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 की रात 09:18 बजे से शुरू होगी और 10 अप्रैल की रात 11:14 बजे तक रहेगी. अष्टमी तिथि 10 अप्रैल को पूरे दिन और रात्रि में व्याप्त रहेगी. पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 10 अप्रैल की रात्रि (निशा काल) का माना जा रहा है.

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क्यों खास है यह दिन?

इस बार कालाष्टमी पर शिव योग और शिववास का विशेष संयोग बन रहा है. साथ ही परिघ योग का प्रभाव भी जुड़ रहा है. यह दुर्लभ स्थिति पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई भैरव पूजा भय, बाधा और नकारात्मकता को दूर करती है.

काल भैरव का महत्व

कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित होती है, जिन्हें भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है. भक्त मानते हैं कि उनकी आराधना से शत्रु बाधा कम होती है और जीवन में सुरक्षा का भाव बढ़ता है. राहु-केतु से जुड़े दोषों में भी राहत मिलने की बात कही जाती है.

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सरल पूजा विधि

सुबह स्नान के बाद काले तिल मिले जल से अभिषेक करें. भैरव प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं. काले तिल, उड़द और फूल अर्पित करें. रात में भैरव चालीसा का पाठ करें. मंत्र “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” का जाप विशेष लाभ देता है.

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विशेष उपाय जो बढ़ाएं फल

  • इस दिन कुत्ते को भोजन कराना बहुत शुभ माना गया है.
  • भगवान भैरव को उड़द की दाल के पकौड़े, जलेबी या काले तिल का भोग लगाएं.
  • मंदिर में दीपदान करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
  • साधक इस दिन मौन व्रत या ध्यान साधना भी करते हैं, जिससे मन स्थिर रहता है.

ध्यान रखने वाली बातें

पूजा के समय मन शांत रखें और जल्दबाजी न करें. साफ स्थान पर पूजा करना जरूरी है. तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें. रात के समय की गई साधना को अधिक प्रभावी माना गया है, इसलिए निशा काल का विशेष ध्यान रखें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 08, 2026 06:32 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक सक्रिय ज्योतिषविद हैं। जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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