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Thali Mein Roti: भोजन की थाली कितनी रोटियां रखनी चाहिए, क्या है हिन्दू धर्म का ‘अन्नपूर्णा नियम’, जानें

Thali Mein Roti: भारतीय परंपरा में थाली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि संस्कार है. मां अन्नपूर्णा के नियमों के अनुसार थाली में कितनी रोटियां रखें, किस क्रम में परोसें और किस दिशा में बैठें, ये सब जीवन और मानसिक संतुलन से जुड़ा है. आइए जानते हैं, हिन्दू धर्म में थाली में 3 रोटियां रखना क्यों अशुभ मानी जाती हैं?

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Thali Mein Roti: भारतीय परंपरा में भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संस्कार माना जाता है. खासकर मां अन्नपूर्णा से जुड़ी मान्यताएं आज भी घर-घर में निभाई जाती हैं. थाली कैसे परोसी जाए, कितनी रोटियां रखी जाएं और भोजन करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाए, ये नियम जीवनशैली और मानसिक संतुलन से भी जुड़े माने जाते हैं. आइए जानते हैं, भोजन की थाली कितनी रोटिया रखनी चाहिए, क्या है हिन्दू धर्म का ‘अन्नपूर्णा नियम’?

थाली से जुड़े अन्नपूर्णा नियम

साफ-सफाई

भोजन परोसने से पहले थाली की साफ-सफाई बेहद जरूरी है. स्वच्छ थाली सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और भोजन को प्रसाद का रूप देती है.

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परोसने का सही क्रम

अन्नपूर्णा परंपरा के अनुसार, सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन और अंत में कड़वे स्वाद वाले पदार्थ परोसे जाते हैं. इससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर संतुलित रहता है.

रोटी की संख्या का नियम

अन्नपूर्णा नियम में थाली में एक साथ 3 रोटियां रखना अशुभ है. इसे मृतक संस्कारों से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए 1, 2 या 4 रोटियां रखना शुभ माना जाता है. सम संख्या को संतुलन और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है.

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दिशा और बैठने का तरीका

भोजन करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. दक्षिण दिशा की ओर बैठकर खाना वर्जित बताया गया है.

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अन्न का सम्मान जरूरी

थाली में परोसे गए भोजन की निंदा नहीं करनी चाहिए. जितना लें, उतना ही खाएं. जूठन छोड़ना अन्न का अपमान माना जाता है.

थाली में हाथ धोने से बचें

भोजन समाप्त होने के बाद थाली में हाथ धोना अनुचित माना गया है. इसे दरिद्रता से जोड़ा जाता है. इसके बजाय अलग स्थान पर हाथ धोना बेहतर है.

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पहले अर्पण, फिर भोजन

भोजन से पहले उसे ईश्वर को अर्पित करने की परंपरा है. कई घरों में पहली रोटी गाय, दूसरी कुत्ते और तीसरी पक्षियों के लिए निकाली जाती है.

अतिथि सबसे पहले

घर में आए अतिथि को पहले भोजन कराना संस्कारों का हिस्सा है. शांत मन और प्रेम से परोसा गया भोजन शरीर के साथ मन को भी तृप्त करता है.

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मॉडर्न लाइफ में भी है जरूरी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी ये नियम अनुशासन सिखाते हैं. भोजन को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि ध्यानपूर्वक करना चाहिए. इससे मानसिक तनाव कम होता है और जीवनशैली बेहतर बनती है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 04, 2026 12:54 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक सक्रिय ज्योतिषविद हैं। जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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